तिलहर। परंपरागत खेती में लगातार घाटा देखकर राजेंद्र पाल सागर ने सहफसली की तरकीब को अपनाया। जब वह खुद मुनाफा लेने लगे तो इस हुनर को उन्होंने आसपास के किसानों से भी साझा किया। 12 वर्षों से गन्ने के साथ आलू, प्याज, मूंगफली और उड़द जैसी फसलों का उत्पादन कर रहे राजेंद्र उन लोगों के लिए आदर्श हैं, जो खेती-किसानी को घाटे का सौदा मानने लगे थे।
मीरानपुर कटरा के मोहल्ला बंगशान निवासी राजेंद्र पाल सागर उर्फ पप्पू बताते हैं कि पिछले 12 वर्षों से वह सहफसली खेती कर रहे हैं। एक वर्ष में गन्ना तैयार होता है। गन्ना बोने के साथ ही वह आलू लगा देते हैं। ढाई से तीन महीने में आलू खोद लिया जाता है। इसके बाद तीसरी फसल प्याज या उड़द में से कोई भी फसल लगा देते हैं। यह फसल भी लगभग तीन महीने में हो जाती है। गन्ने के साथ प्रतिवर्ष दो अन्य सहफसली खेती करके दोगुना से ज्यादा मुनाफा कमा लेते हैं। बताया कि महंगाई बढ़ने और उपज का कम मूल्य मिलने से आमदनी प्रभावित हो रही है। इस पर सरकार को ध्यान देना चाहिए।
प्रगतिशील किसान राजेंद्र पाल के पास 65 बीघा खुद की खेती है। पहले इसमें धान, गन्ना, गेहूं की फसल ही करते थे, लेकिन कई बार मौसम, सिंचाई के महंगे साधन आदि के कारण नुकसान भी उठाना पड़ जाता था। इसके बाद उन्हें किसी ने सहफसली के बारे में बताया। उन्हें यह विचार भा गया। सहफसली का चस्का लगने के बाद उन्होंने ठेके में खेती लेना शुरू कर दिया। वर्तमान में वह 150 बीघा खेती कर मुनाफा कमा रहे हैं। राजेंद्र ने बताया कि गन्ने को रूपापुर चीनी मिल ले जाते हैं। मूंगफली और उड़द की फसल को जलालाबाद और अल्हागंज की मंडी में ले जाकर बेच देते हैं। आलू और प्याज की फसल कटरा में ही बिक जाती है। संवाद
कई लोगों को सिखाया यह कौशल
राजेंद्र पाल लोगों को सहफसली खेती करने की प्रेरणा देते हैं। अब तक वह कई लोगों को सहफसली खेती से जोड़ चुके हैं। तमाम लोग आकर उनसे खेती करने की विधि की जानकारी हासिल करते हैं। बताया कि ट्रेंच विधि से उत्पादन बढ़ाया जा सकता है। जो लोग कहते हैं कि खेती में कुछ नहीं रखा है, यह उनकी नासमझी है। जो मन लगाकर खेती करता है, उसे यह भूमि बहुत कुछ देती है।
एक एकड़ में पांच सौ क्विंटल गन्ना उत्पादन
राजेंद्र ने बताया कि वह छह भाइयों में तीसरे नंबर पर हैं। पहले बहुत कम खेती थी, लेकिन धीरे-धीरे सहफसली से मुनाफा कमाया और अब खेती को बढ़ाते जा रहे हैं। बारिश कम होने के बावजूद वह अपने संसाधनों से गन्ने की फसल को बेहतर बना रहे हैं। वह एक एकड़ में लगभग पांच सौ क्विंटल गन्ना का उत्पादन कर लेते हैं। रूपापुर चीनी मिल के अधिकारी उन्हें अधिक गन्ना उत्पादन पर हमेशा बधाई देते रहे हैं।
खेती करने वालों के लिए सहफसली खेती एक अच्छा विकल्प है। उत्पादन बढ़ने के साथ ही किसान आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर होता है। मेरी किसानों से अपील है कि वे इस ओर कदम बढ़ाकर अपना लाभ दोगुना कर सकते हैं। -राजेंद्र पाल सागर, प्रगतिशील किसान
जैतीपुर में गन्ने की लहलहाती फसल- फोटो : SHAHJAHANPUR