बरेली में जमीन के सर्किल रेट बढ़ने के बाद अब निर्माण सामग्री भी महंगी हो गई है। कारोबारियों के मुताबिक, सरिया, ईंट, रेत और बजरफुट के दामों में 10 फीसदी तक का उछाल आया है। ट्रांसपोर्टरों ने भाड़ा बढ़ा दिया है। मजदूरी में भी इजाफा हुआ है। नतीजा, आम आदमी के लिए अब आशियाना बनाना महंगा हो गया है। घरों की कीमत में हुई बढ़ोतरी का 66 फीसदी हिस्सा निर्माण सामग्री की महंगाई से जुड़ा है, जबकि बाकी 34 फीसदी हिस्सा अन्य कारकों का परिणाम है।
मकान बनवा रहे लोगों का कहना है कि बजट पहले से तय था, लेकिन निर्माण सामग्री की कीमतों और मजदूरी में बढ़ोतरी की वजह से आर्थिक संकट खड़ा हो गया है। राजमिस्त्री और मजदूरों ने अपनी दिहाड़ी में 100 से 125 रुपये तक की वृद्धि कर दी है। इससे निर्माण लागत पर दोहरा असर पड़ रहा है।
पश्चिम एशिया तनाव का असर भी निर्माण सामग्रियों पर पड़ रहा है। सप्लाई चेन प्रभावित होने से ईंधन, परिवहन और कच्चे माल की लागत में वृद्धि हुई है। इससे निर्माण लागत में सीधे तौर पर 8-10 फीसदी का इजाफा हुआ है। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि वैश्विक परिस्थितियां जल्द सामान्य नहीं हुई तो घर बनाने की लागत और बढ़ सकती है।
इस तरह बढ़े दाम
| सामग्री |
अगस्त में |
सितंबर में |
| सरिया |
5,500 |
5,900 |
| लोहे के एंगल |
5,600 |
6000 |
| लोहे के पाइप |
5,400 |
6,200 |
| जंगरोधी स्टील |
16,000 |
17,500 |
| बजरफुट |
125 |
140 |
| रेत |
100 |
120 |
नोट : कीमतें कारोबारियों के मुताबिक रुपये प्रति क्विंटल में।
माल भाड़ा बढ़ने से बढ़ीं कीमतें
डीजल और टायरों के दाम बढ़ने से बढ़ा माल भाड़ा जिले में निर्माण कार्य के लिए जरूरी बजरफुट और रेत अधिकतर हल्द्वानी और बाजपुर से मंगाया जाता है। कारोबारियों के अनुसार, ट्रांसपोर्टरों ने गाड़ियों का भाड़ा काफी बढ़ा दिया है। जो माल ढुलाई पहले 35 से 38 रुपये प्रति क्विंटल की दर से होती है, अब वह बढ़कर 40-45 रुपये पहुंच गई है।
ट्रांसपोर्टर राम कृष्ण शुक्ला ने बताया कि डीजल और टायरों की कीमतों में इजाफे और गाड़ियों के रखरखाव से जुड़े अन्य खर्चे बढ़ने के कारण माल भाड़ा बढ़ाना पड़ा है। परिवहन लागत में वृद्धि का सीधा असर निर्माण सामग्री की कीमतों पर पड़ रहा
माल भाड़ा बढ़ने से बढ़ीं कीमतें
डीजल और टायरों के दाम बढ़ने से बढ़ा माल भाड़ा जिले में निर्माण कार्य के लिए जरूरी बजरफुट और रेत अधिकतर हल्द्वानी और बाजपुर से मंगाया जाता है। कारोबारियों के अनुसार, ट्रांसपोर्टरों ने गाड़ियों का भाड़ा काफी बढ़ा दिया है। जो माल ढुलाई पहले 35 से 38 रुपये प्रति क्विंटल की दर से होती है, अब वह बढ़कर 40-45 रुपये पहुंच गई है।
ट्रांसपोर्टर राम कृष्ण शुक्ला ने बताया कि डीजल और टायरों की कीमतों में इजाफे और गाड़ियों के रखरखाव से जुड़े अन्य खर्चे बढ़ने के कारण माल भाड़ा बढ़ाना पड़ा है। परिवहन लागत में वृद्धि का सीधा असर निर्माण सामग्री की कीमतों पर पड़ रहा