मिर्जापुर। शृंगी ऋषि की तपोस्थली के रूप में विख्यात पौराणिक और धार्मिक आस्था का प्रमुख केंद्र ढाई घाट के गंगा तट पर 30 दिसंबर से सात फरवरी तक माघ मेला रामनगरिया के आयोजन की जिला पंचायत ने तैयारियां तेज कर दी हैं। साधु-संतों और पंडों-पुजारियों ने वहां अपना डेरा डालना शुरू कर दिया है। अब वहां कल्पवास को आने वाले श्रद्धालुओं के लिए तंबुओं की नगरी बसाने की तैयारी है।
ढाई घाट पर कल्पवास करने के लिए न सिर्फ जनपद, बल्कि आसपास के कई जिलों से बड़ी संख्या में श्रद्धालु सपरिवार आते हैं। हर वर्ष की तरह इस बार भी जिला पंचायत ने वहां टेंट, पेयजल, प्रकाश, सफाई आदि व्यवस्थाओं सहित सीसी कैमरे आदि सुरक्षा के संसाधनों और अन्य मूलभूत सुविधाओं पर लाखों रुपये का बजट खर्च करने की तैयारी की है।
अभी मेला क्षेत्र में जेसीबी लगाकर सड़कों को व्यवस्थित किया जा रहा है। खेल-तमाशे, झूले, खिलौनों आदि की दुकानें भी आनी शुरू हो गईं हैं। ढाई घाट में माघ माह के दौरान गंगा तट पर एक महीने तक रहकर साधु-संत और गृहस्थ आत्मशुद्धि के लिए तप, ध्यान और साधना करते हैं। भजन-कीर्तन, मंत्र जाप और ध्यान की इस प्रक्रिया को कल्पवास कहा जाता है।
-
पौष पूर्णिमा पर तीन जनवरी को होगा मुख्य स्नान पर्व
माघ मेले का पहला मुख्य स्नान पर्व पौष पूर्णिमा पर तीन जनवरी को होगा। तत्पश्चात, 15 जनवरी को मकर संक्रांति, 18 जनवरी को मौनी अमावस्या और 23 जनवरी को माघ पूर्णिमा पर प्रमुख स्नान पर्व होंगे। इन तिथियों में श्रद्धालुओं की भीड़ उमड़ने के मद्देनजर मेला स्थल पर संपर्क मार्ग दुरुस्त करने का काम शुरू कर दिया गया है। हालांकि, सभी स्नान पर्वों पर भारी भीड़ होने की दशा में कोलाघाट के पुराने पुल पर जाम की समस्या से निपटना पुलिस-प्रशासन के लिए चुनौती भरा कार्य होगा।
000
श्रद्धालुओं के लिए बिजली, पेयजल, सफाई, शौचालय आदि सुविधाएं उपलब्ध कराने के लिए जिला पंचायत ने 40 लाख रुपये के बजट को मंजूरी दी है। माघ मेले की सभी तैयारियां पूरी हो गईं हैं। साफ-सफाई के साथ श्रद्धालुओं की सुरक्षा के नदी तट पर गोताखोरों को तैनात किया जा रहा है। जाम की समस्या से निपटने के लिए पुलिस का सहयोग लिया जा रहा है।
- ममता यादव, जिला पंचायत अध्यक्ष