गर्भवती महिलाओं में खून की कमी पाए जाने को शासन ने गंभीरता से लेते हुए 27 जनवरी से तीन फरवरी तक मातृत्व सप्ताह मनाने का निर्णय किया है। इस संबंध में डीएम शुभ्रा सक्सेना ने सोमवार को कैंप कार्यालय में संबंधित अधिकारियों के साथ बैठक करके उन्हें रक्ताल्पता की शिकार गर्भवती महिलाओं के चिन्हीकरण का काम शुरू करने के निर्देश दिए।
डीएम ने बताया कि इस अभियान के आयोजन से पहले जो तथ्य प्रकाश में आए, उनसे पता चला कि 50 प्रतिशत से अधिक गर्भवती महिलाएं खून की कमी से पीड़ित हैं। वर्ष 2013-14 में यूनिसेफ द्वारा कराए गए रैपिड सर्वे से स्पष्ट हुआ कि केवल 64 प्रतिशत गर्भवती महिलाओं का पंजीकरण हुआ और उनमें से केवल 28 प्रतिशत महिलाओं की गर्भकाल के दौरान जांच हो सकी। यही नहीं, सिर्फ सात फीसदी महिलाओं को आयरन की गोलियां प्राप्त हुईं और केवल चार प्रतिशत महिलाओं ने गोलियों का सेवन किया।
डीएम ने कहा कि इन्हीं कमियों को दूर करने के लिए मातृत्व सप्ताह आयोजित किया जाएगा। इसके तहत प्रत्येक दिन प्रात: नौ बजे से शाम चार बजे तक आंगनबाड़ी केंद्रों पर सभी गर्भवती महिलाओं की समस्त जांचें की जाएंगी। चार फरवरी को रिपोर्ट संकलन के साथ छूटी महिलाओं की जांच होगी। इस दौरान प्रत्येक दिन हाई रिस्क प्रेगनेंसी महिलाओं की पहचान की जाएगी। सीएमओ डॉ. कमल कुमार ने बताया कि मातृत्व सप्ताह का व्यापक प्रचार-प्रसार कराया जा रहा है।