फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

प्रधानी: पर्चा खारिज होने पर ग्रामीणों का प्रदर्शन

Tue, 24 Nov 2015 11:27 PM IST
शाहजहांपुर।
विज्ञापन
विज्ञापन
ददरौल ब्लॉक की ग्राम पंचायत बलेली में प्रधान पद की उम्मीदवार गंगावती का नामांकन पर्चा खारिज होने का मामला मंगलवार को तूल पकड़ गया जब प्रत्याशी और उनके समर्थकों ने मुख्यालय पर आकर कलक्ट्रेट में हंगामेदार प्रदर्शन किया। ग्रामीणों के साथ मौजूद प्रत्याशी गंगावती ने सिटी मजिस्ट्रेट को डीएम के नाम ज्ञापन देकर प्रतिद्वंदी उम्मीदवार सुशीला और उनके समर्थकों पर चुनाव जीतने के लिए वोटर लिस्ट में संशोधन के बहाने उनका नाम कटवा देने का आरोप लगाते हुए पूरे प्रकरण की जांच की मांग की।
विज्ञापन

बता दें कि वर्ष 2015 की मतदाता सूची में अनुसूवित जाति की गंगावती पत्नी कदार का नाम क्रमांक 1001 पर दर्ज है। इसी आधार पर उन्होंने आरओ को अपना नामांकन पत्र प्रस्तुत किया। दूसरी ओर बलेली निवासी केदार की पत्नी सुशीला देवी ने भी प्रधानी के लिए नामांकन कराया। नामांकन पत्रों की जांच के दौरान संशोधित मतदाता सूची से प्रत्याशियों का मिलान करने पर उसमें गंगावती का नाम दर्ज नहीं पाया गया।
मालूमात करने पर ददरौल के आरओ नामित किए गए जिला शिक्षा एवं प्रशिक्षण संस्थान के प्रधानाचार्य राकेश कुमार को पता चला कि गंगावती को मृतक मानकर उनका नाम मतदाता सूची से विलोपित किया गया है। इसी आधार पर आरओ ने गंगावती की उम्मीदवारी का पर्चा खारिज कर दिया गया। इस मामले को लेकर गंगावती रविवार को लखनऊ जाकर निर्वाचन आयोग में भी शिकायत कर चुकी हैं।
विज्ञापन

इसके बावजूद संशोधित मतदाता सूची में कोई परिवर्तन होते नहीं देख गंगावती और उनके समर्थकों का धैर्य जवाब दे गया। नतीजे में उन सभी ने कलक्ट्रेट जाकर अपना विरोध दर्ज कराया। डीएम को दिए ज्ञापन में गंगावती ने कहा है कि राजनीतिक विरोध के कारण प्रतिद्वंदी ने कर्मचारियों की मिलीभगत से पर्चा खारिज करा दिया है। प्रदर्शन में सुभाष शर्मा, सोनपाल, धनपाल वर्मा, लाल सहाय वर्मा, कल्याण सिंह, आदेश कुमार, राम रोशनी देवी, संतराम, रामवीर, सतीश चंद्र आदि शामिल रहे।


संशोधित वोटर लिस्ट को बनाया जांच का आधार
प्रधानी के चुनाव को ददरौल ब्लॉक में आरओ नियुक्त किए गए जिला शिक्षा एवं प्रशिक्षण संस्थान के प्रधानाचार्य राकेश कुमार के अनुसार बलेली गांव की संशोधित मतदाता सूची में ममता वर्मा का नाम नहीं होने के कारण उनका नामांकन पत्र रद्द किया गया। सुशीला देवी के पति का नाम भी कदार के बजाय केदार दर्ज पाया गया जबकि ममता वर्मा ने नामांकन पत्र में पति का नाम कदार उर्फ केदार लिखा है। वोटर लिस्ट संशोधन में यदि किसी तरह की गड़बड़ी हुई और इसी वजह से ममता का नाम दर्ज नहीं हो सका तो यह अलग जांच का विषय है।
विज्ञापन
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें