शाहजहांपुर। शहर में न तो बचाव के लिए निगरानी तंत्र है और न ही आग लगने पर बुझाने के मुकम्मल इंतजाम। शून्य जवाबदेही और अग्नि सुरक्षा के हर मानक की अनदेखी से हादसे का खतरा हर समय बना रहता है। आग लगने पर अतिक्रमण के कारण संकुचित सड़कें, व्यस्त बाजार में फायर ब्रिगेड की टीम नहीं पहुंच सकती। स्कूल-कॉलेज, अस्पताल, रेस्टोरेंट-होटल समेत अन्य व्यावसायिक प्रतिष्ठानों में अधिकतर के पास फायर विभाग का अनापत्ति प्रमाणपत्र (एनओसी) नहीं है। लखनऊ में सोमवार को हुए हादसे के बाद भी जिम्मेदार नहीं चेते हैं। मंगलवार को विभिन्न जगहों की पड़ताल की गई तो यह बात सामने आई।
सदर बाजार स्थित चूड़ी वाली गली इतनी संकरी है कि यहां पर दो ई-रिक्शे एक साथ नहीं निकल सकते। सौंदर्य प्रसाधन के सामान की दुकानें अधिक होने के कारण त्योहारी सीजन में पैदल निकलना दूभर हो जाता है। गली के बीच में लोहे का खंभा लगा होने पर आग लगने पर फायर ब्रिगेड की गाड़ी नहीं निकल सकती।
चौक क्षेत्र के गुदड़ी बाजार का भी यही हाल है। यहां पर ई-रिक्शा तक बमुश्किल पहुंच पाता है। नगरीय क्षेत्र की घनी आबादी में कई प्रतिष्ठान बेसमेंट में चल रहे हैं। यहां आग से बचाव के मानकों को भी पूरा नहीं किया जा रहा। इसके बाद भी कोई देखने वाला कोई नहीं है। शहर की मशीनरी मार्केट में तार काफी नीचे लटक रहे हैं। तारों से हादसा होने का डर बना रहता है।
शिक्षण संस्थाओं की मान्यता के नाम पर खेल...जिम्मेदारों ने फेर लिया मुंह
जिले में कक्षा एक से 12 तक के 1360 निजी स्कूल शिक्षा विभाग के आंकड़ों में दर्ज हैं। इसमें कक्षा एक से आठ तक के 1026 स्कूल शामिल हैं। शिक्षा विभाग ने मान्यता के लिए कई बिंदुओं का फार्मेट तैयार कर रखा है, लेकिन फायर एनओसी को लेकर उनके पास स्पष्ट जवाब नहीं है। उनका तर्क है कि निजी स्कूलों की मान्यता पर फायर एनओसी लगती है। सवाल यह उठता है कि एनओसी लगती है तो तंग गलियों में संचालित निजी स्कूलों को एनओसी कैसे मिल गई। तंग गलियों में स्थित स्कूलों में चार पहिया वाहन से भी पहुंचना मुश्किल है। जानकारों के अनुसार, विभाग के कार्यालय में लंबे समय से एक ही पटल पर जमे बाबू ही मान्यता के नाम पर बड़ा खेल कर रहे हैं। अधिकारियों के करीबी होने के कारण उनके ऊपर कार्रवाई नहीं की जाती। इसी तरह 156 कोचिंग के पास भी एनओसी नहीं है। इन्हें भी अनुमति बिना फायर एनओसी के ही बांट दी गई है। अस्पताल भी गलियों में संचालित हो रहे हैं। सुरक्षा इंतजामों के नाम पर मात्र अग्निशमन यंत्र लगे हैं।
बड़े होटलों में मानक पूरे, शेष में व्यवस्थाएं ही चेक करते हैं अफसर
अग्निशमन विभाग के अनुसार, लगभग 10 होटलों में पांच के पंजीकरण पूरे हैं। शेष को भी समय-समय पर चेक करते रहते हैं। वहां अग्निसुरक्षा के इंतजामों को परखा जाता है। जिले में एक बहुमंजिला इमारत के पास विभाग की एनओसी है। जिले में दो सौ के करीब होटल हैं। स्टेशन रोड पर ही करीब आठ-दस होटल हैं। इनके संबंध में विभाग के पास कोई जवाब नहीं है।
यह है एनओसी लेने का नियम
एनओसी के लिए फायर समिति की वेबसाइट पर नक्शा अपलोड करना पड़ता है। पोर्टल पर आवेदन के बाद अग्निशमन विभाग के अफसर जांच करते हैं। उसी के अनुसार, ई-मेल आईडी पर एनओसी जारी कर दी जाती है।
ये हैं अग्निशमन विभाग के पास इंतजाम
-नगरीय क्षेत्र में चार बड़ी गाड़ी और तीन छोटी गाड़ी, जो आबादी के हिसाब से पर्याप्त नहीं हैं।
-मुख्य अग्निशमन अधिकारी, एफएसओ व 38 सिपाही हैं। दो एफएसओ के पद रिक्त हैं।
-तहसील स्तर पर एक बड़ी गाड़ी के साथ ही चार-चार सिपाही तैनात हैं। जो नाकाफी हैं।
शहर में सिटी मजिस्ट्रेट और तहसील क्षेत्र में एसडीएम की अगुवाई में टीमें गठित की गईं हैं। टीम में सीओ और अग्निशमन अधिकारी शामिल होंगे। टीमें शिक्षण संस्थाओं के साथ ही अन्य स्थानों की जांच कर रिपोर्ट देंगी। उसके अनुसार कार्रवाई की जाएगी। यह प्रक्रिया सतत चलती रहेगी।
-धर्मेंद्र प्रताप सिंह, डीएम
आग से बचाव के इंतजामों को समय-समय पर चेक किया जाता है। जहां कमियां मिलती हैं, उन्हें दुरुस्त कराया जाता हैं। एनओसी के लिए विभाग की वेबसाइट पर सीधे आवेदन किया जा सकता है। जो कमियां हैं उनको दूर करने का प्रयास किया जा रहा है।
-डॉ.बीएन पटेल, एफएसओ
चौक में गुदड़ी बाजार का संकरा मार्ग। संवाद
चौक में गुदड़ी बाजार का संकरा मार्ग। संवाद
चौक में गुदड़ी बाजार का संकरा मार्ग। संवाद
चौक में गुदड़ी बाजार का संकरा मार्ग। संवाद