अमन और भाईचारा की दुआ को उठे हजारों हाथ
ईद-उल-अजहा (बकरीद) त्योहार रिमझिम बरसात के बीच हर्षोल्लास से मनाया गया। नमाजियों ने बरसात से सराबोर मैदान से बचते हुए आसपास की मस्जिदों और शेडदार स्थलों पर ईद की नमाज अदा की। ईदगाह बड़े खुतबे में पेश इमाम मौलाना हुजूर अहमद मंजरी ने नमाज पढ़ाने से पूर्व नमाजियों को संदेश देते हुए कहा कि हमें आपस में सौहार्दपूर्ण वातावरण का निर्माण करना चाहिए, ताकि समाज में अमन-चैन बरकरार रह सके। आज के दिन हमें बुराइयों की कुर्बानी देनी चाहिए, ताकि हम अल्लाह तआला के पैगाम को अच्छी तरह निभा सकें। एक मुसलमान को कुर्बानी मुकद्दस है, हमें अकीदत और मोहब्बत के साथ इस त्योहार को मनाना चाहिए।
मौलाना मंजरी ने कहा कि अल्लाह की खुशी के लिए प्रत्येक मुसलमान को कुर्बानी देनी चाहिए। इसके बाद मौलाना हुजूर अहमद मंजरी ने मुल्क और कौम की तरक्की के लिए दुआ की।
बरसात के कारण नमाजियों को ईद-उल-अजहा की नमाज पढ़ने के लिए परेशानी का सामना करना। कुछ ने ईदगाह में ही नमाज अदा की, लेकिन अधिकांश लोगों ने आसपास की मस्जिदों और शेडदार स्थलों में नमाज अदा की। बरसात के कारण तमाम लोग घर से निकले ही नहीं और उन्होंने समीप की मस्जिद में नमाज पढ़ी। रात से शुरू हुई बरसात सुबह तक नहीं थमने के कारण ईद की नमाज निर्धारित समय से शुरू नहीं हो सकी। नमाजी बच्चों को गोद में दिए ईदगाह की ओर जाते देखे गए। कुछ ने हिम्मत जुटाकर छाता का सहारा लेकर ईदगाह में ही नमाज पढ़ी।
बच्चों ने गले मिलकर दी मुबारकबाद
त्योहार को लेकर बच्चों में खासा उत्साह रहता है। बरसात ने पूरीे कोशिश की कि बच्चों की खुशियों में खलल डाला जाए, लेकिन बच्चों के उत्साह में कोई कमी नहीं दिखी। नमाज के बाद उन्होंने एक-दूसरे से गले मिलकर ईद की मुबारकबाद दी।
व्यवस्थापक जुटे रहे, नहीं पहुंचे नमाजी
बरसात के कारण ईदगाह क्षेत्र में जगह-जगह जल भराव हो गया। खास बात रही कि खास त्योहार (बड़ी ईद) होने के बावजूद अधिकांश मुसलमान नमाज पढ़ने के लिए ईदगाह नहीं पहुंचे, उनका काफी इंतजार करने बाद ही मौलाना हुजूर अहमद मंजरी ने नमाज पढ़ाई। बरसात के बावजूद सुरक्षा व्यवस्था में जुटे पुलिसकर्मी, मीडियाकर्मी, अधिकारीगण ईदगाह समय से पहुंच गए, लेकिन नमाजियों ने आसपास की मस्जिदों में ही नमाज पढ़ने में भलाई समझी।