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Shahjahanpur News: एकात्म भाव से ध्यान साधना में डूबे देश-विदेश के अभ्यासी

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फ्रैंकोइस ग्रोसिएट
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शाहजहांपुर। श्री रामचंद्र मिशन में वसंतोत्सव 2026 का शुभारंभ पूर्ण दिव्यता, भव्यता और आध्यात्मिक उल्लास के साथ हो गया। कार्यक्रम के दौरान देश-विदेश से आए अभ्यासी ध्यान, प्रेम और करुणा की त्रिवेणी में डूबे रहे। सामूहिक ध्यान साधना कर मानव कल्याण और विश्व शांति के लिए मंगल कामना की।
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मिशन के अध्यक्ष एवं हार्टफुलनेस मेडीटेशन के मार्गदर्शक गुरुदेव कमलेश डी पटेल ‘दाजी’ के सान्निध्य में सुबह साधना की गई। साधकों की चेतना को नवप्रकाश से आलोकित करने का विराट यज्ञ बन गया। देश–विदेश से आए हजारों अभ्यासियों ने एकात्म भाव से सामूहिक ध्यान-साधना की।
उत्सव का शुभारंभ ध्यान सत्र से हुआ। इसमें वातावरण शांति, श्रद्धा और साधना की दिव्य तरंगों से गुंजायमान हो उठा। इस अवसर पर गुरुदेव कमलेश डी. पटेल ‘दाजी’ ने प्रेरक संदेश में वसंत पंचमी के आध्यात्मिक रहस्य को उद्घाटित करते हुए कहा कि वसंत केवल ऋतु परिवर्तन का संकेत नहीं, बल्कि चेतना के नवीकरण का प्रतीक है।
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उन्होंने कहा कि इसी पावन तिथि को दिव्य प्रकाश ने पृथ्वी पर अवतरण का संकल्प लिया था। वर्ष 1873 की वसंत पंचमी को फतेहगढ़ में एक ऐसी महान आत्मा का अवतरण हुआ, जिसने मानवता की आध्यात्मिक यात्रा को नवीन दिशा प्रदान की। वही महापुरुष आगे चलकर ‘लालाजी महाराज’ के नाम से विख्यात हुए।
दाजी ने कहा कि लालाजी महाराज के माध्यम से मानवता को एक विस्मृत आध्यात्मिक धरोहर प्राणाहुति का पवित्र विज्ञान पुनः प्राप्त हुआ, जिसे ‘प्राणस्य प्राणः’, अर्थात जीवन के मूल तत्व का संचार कहा गया है। सायंकाल में भी ध्यान सत्र में दाजी ने ध्यान कराया।

17 वर्ष की उम्र से बाबूजी से जुड़ी हूं। उनके बताए गए मेडिटेशन से बड़ी ही आत्मिक शांति मिलती है। जीवन में कई उतार चढ़ाव आए, लेकिन बाबूजी की प्रेरणा से हर बाधा को पार कर दिया। आश्रम के स्वर्ण जयंती समारोह में आना एक सौभाग्य की तरह है। जीवन में शांति और प्रेम सबसे महत्वपूर्ण है। अगर शांति नहीं तो जीवन व्यर्थ है।
- फ्रैंकोइस ग्रोसिएट, डेनमार्क

वर्ष 1972 में डेनमार्क में बाबूजी से मुलाकात हुई थी। यह मुलाकात जीवन भर भुला नहीं पाऊंगा। उनके व्यक्तित्व से इतना प्रभावित हुआ कि जहां वे आते थे, वहां वहां मैं भी जाता था। उन्होंने योग, सहज मार्ग और शांति का ऐसा पाठ पढ़ाया है कि आज 79 वर्ष की अवस्था में भी फिट और खुशहाल महसूस करता हूं।
- लैफ वांग लाइसन, डेनमार्क

वर्ष 1997 से बाबूजी की शिक्षाओं का अनुसरण कर रहीं हूं। जीवन से विकार दूर हो गए। 2010 से मेडिटेशन ट्रेनर का कार्य कर रही हूं। सुकून के साथ साथ सहज मार्ग के पथ पर जीवन बढ़ रहा है। पूरा परिवार बाबूजी का अनुयायी है। शुरू में सास आपत्ति करती थीं, लेकिन 84 वर्ष की अवस्था में वह बाबूजी के आश्रम में आईं।
- अंजू श्रीवास्तव, कानपुर

फोटो 32
वर्ष 2005 से मेरा जुड़ाव है। बाबूजी की शिक्षाओं से मेरे हर प्रश्न का जवाब खुद मिल जाता है। बचपन में पढ़ाई के दौरान एक बार बहुत तनाव में आ गया था। एक सप्ताह तक सो नहीं पाया। तब बाबूजी की पुस्तक पढ़ी। मन हल्का हो गया। तबसे आज तक एक पल के लिए भी बाबूजी का नाम दिल से नहीं निकलता।
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- नीरज, तेलंगाना

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