गर्रा और खन्नौत नदियों में रेता खनन करने और शहर का कूड़ा-करकट, पॉलीथिन और रसायनिक तत्व बहाए जाने की वजह से नदियों की जैव विविधिता समाप्त हो रही है। इसके साथ ही नदियों के प्रदूषित होने की वजह से उनके आसपास की जमीन भी बंजर होने का खतरा बढ़ रहा है।
इस संबंध में जीएफ कॉलेज के प्रोफेसर स्वप्निल यादव का कहना है कि रेता खनन होने से मछलियां और पौधे समाप्त होते जा रहे हैं। इससे जलजीवों और पौधों की जैवा विविधता खत्म हो जाएगी। कहा कि गंगा के प्रदूषण की वजह से डॉल्फिन खत्म हो चुकी है। कहा कि गर्रा और खन्नौत नदियों में कूड़ा करकट बहाने की वजह से मछलियां और वनस्पतियां समाप्त हो रही हैं। इससे नदियों के किनारे की खेती योग्य जमीन बंजर हो जाएगी।
ट्रचिंग ग्राउंड को नहीं मिल सकी जमीन
नगर पालिका परिषद के तमाम प्रयासों के बावजूद अभी तक ट्रचिंग ग्राउंड के लिए जमीन नहीं मिल सकी है। इससे शहर का सारा कूड़ा करकट या तो नदियों में बहाया जा रहा है या फिर खेतों के आसपास डाला जा रहा है। इससे नदियां और कृषि योग्य जमीन प्रदूषित हो रही हैं। लंबे अर्से से ट्रचिंग की जमीन खरीदने की बात नगर पालिका परिषद की ओर से कही जा रही है। इस संबंध में नगर पालिका परिषद के चेयरमैन तनवीर खां का कहना है ददरौल ब्लाक में जमीन मिल गई थी, लेकिन शहर से दूरी होने की वजह से वहां जमीन नहीं खरीदी गई। शहर के आसपास जल्द ही जमीन खोज ली जाएगी।