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Shahjahanpur News: सेवानिवृत्त इंजीनियर से 3.86 करोड़ की ठगी के आरोपी को पुलिस ने पकड़ा

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रोजा पुलिस की गिरफ्त में आरोपी ​अ​भिषेक सम्राट सिंह। स्रोत: मीडिया सेल
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शाहजहांपुर। डिजिटल अरेस्ट कर 3.86 करोड़ की साइबर ठगी के मामले में पश्चिम बंगाल से आई टीम ने रोजा पुलिस की मदद से बृहस्पतिवार सुबह अहमदनगर गांव निवासी अभिषेक सम्राट सिंह को मोहल्ला गोविंद नगर मठिया कॉलोनी से गिरफ्तार कर लिया। थाने लाकर उससे कई घंटे पूछताछ की गई।
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पश्चिम बंगाल के पश्चिम वर्धमान जिले के थाना असनसोल क्षेत्र के वलभद्र टावर, फ्लैट नंबर ए/3, कोर्ट मोड़ निवासी 61 वर्षीय अमल मन्ना एक कोयला कंपनी में सीनियर इंजीनियर के पद से सेवानिवृत्त हैं। उन्होंने खुद को डिजिटल अरेस्ट कर 3.86 करोड़ रुपये की ठगी की थाने में रिपोर्ट दर्ज कराई थी।
बताया था कि उनके पास एक अंजान नंबर से कॉल आई। ठग ने क्राइम ब्रांच का अधिकारी बताते हुए उन्हें धमकाया। कहा कि उनके खाते से हवाला के करोड़ों रुपये भेजे गए हैं। कार्रवाई की धमकी देते हुए उन्हें तीन-चार दिन तक डिजिटल अरेस्ट कर खाते में रुपया डलवा लिया। साथ ही एक चेक देकर विश्वास दिलाया कि जांच पूरी होने पर रुपया वापस हो जाएगा।
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पुलिस ने रिपोर्ट दर्ज कर जांच शुरू की। मोबाइल नंबर को सर्विलांस पर लगाया। आरोपी की लोकेशन को ट्रेस किया। पता चला कि आरोपी की लोकेशन शाहजहांपुर जिले के थाना रोजा क्षेत्र की गोविंद नगर काॅलोनी में है। बुधवार की रात पश्चिम बंगाल पुलिस शाहजहांपुर पहुंची। रोजा पुलिस की मदद से मिली लोकेशन के आधार पर मकान की घेराबंदी की।
आरोपी अभिषेक उर्फ सम्राट को पकड़ लिया। जिस मकान से आरोपी को पकड़ा, वह मकान रेलवे कर्मी का बताया जा रहा है। अभी तक पता चला है कि ठग ने इस तरह की घटना को दिल्ली, यूपी और इंदौर में भी अंजाम दिया है। रोजा थाना प्रभारी राजीव कुमार ने बताया कि कागजी कार्रवाई पूरी कर आरोपी को पश्चिम बंगाल पुलिस अपने साथ ले जाएगी।

पुलिस नहीं करती किसी को डिजिटल अरेस्ट
एसपी राजेश द्विवेदी ने बताया कि डिजिटल अरेस्ट के मामले में एक आरोपी को पकड़ा है। वह नया खाता खुलवाता था। रुपया लेकर डाटा उपलब्ध करा देता था। उन्होंने बताया कि डिजिटल युग में साइबर अपराध तेजी से बढ़ रहे हैं। किसी भी संदिग्ध कॉल, लिंक या सोशल मीडिया अकाउंट पर विश्वास न करें। ऑनलाइन ठगी, ओटीपी फ्रॉड, बैंकिंग स्कैम और फर्जी सोशल मीडिया अकाउंट से बचाव के लिए जागरूकता सबसे बड़ा हथियार है। उन्होंने कहा कि पुलिस द्वारा कभी भी किसी को डिजिटल अरेस्ट नहीं किया जाता है और न ही डिजिटल अरेस्ट के लिए वीडियो कॉल की जाती है। यदि कोई ऐसा करता है तो तत्काल साइबर हेल्पलाइन 1930 या पुलिस को सूचित करें।
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