पुवायां। भैंसी नदी में अवैध रेत खनन के मामले में डीएम के कड़ा संज्ञान लेने के बाद अधिकारियों ने लीपापोती शुरू कर दी है। नदी में बने गड़्ढे खनन करने वालों ने पाट दिए हैं।
नदी पुनर्जीवन अभियान के तहत डीएम ने गोमती की सहायक नदी भैंसी का चयन किया था। लगभग 17 सालों से सूखी पड़ी भैंसी नदी की खोदाई कराई गई थी, जिसमें लगभग 27 लाख रुपये खर्च हुए थे। लोकभारती कार्यकर्ताओं और तमाम स्वयंसेवकों ने नदी खोदाई कार्य और पौधरोपण में योगदान दिया था। नदी में अभी पुवायां खुटार रोड तक पानी नहीं आया है।
इसी दौरान नदी के सूखे होने के कारण कुछ लोग रेत खनन कर बिक्री करने लगे। गांव मीरपुर के पास कई स्थानों पर रेत खनन किया गया, जिससे नदी में गहरे गड्ढे हो गए। भैंसी नदी के लिए बने व्हाटसएप ग्रुप में तमाम स्वयंसेवकों ने खनन के मामले में शिकायत की। ग्रुप में कई अधिकारी भी जुड़े हैं।
मामला सुर्खियां बना तो खनन से बने गड्ढों को पटवा दिया गया, जिससे पूरे मामले को छिपाया जा सके। दस से 12 सितंबर तक गड्ढे भरने का काम चलता रहा। अब गड़्ढे भरने का वीडियो भी सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है। अधिकारी खनन के मामले में लीपापोती में जुटे हैं। वैसे अमर उजाला ऐसे किसी वीडियो की पुष्टि नहीं करता है।
अधिकारियों की ओर से मामले की जांच के निर्देश पर बृहस्पतिवार को मौके पर गया था। भैंसी नदी में कहीं खनन हुआ नहीं मिला है। फावड़े से मिट्टी हटाई गई है।
- अभिषेक पटेल, जिला खनन अधिकारी, शाहजहांपुर
भैंसी नदी में खनन से बने गड्ढे, अब इनको पाट दिया गया है। संवाद