एक ओर जहां परिषदीय स्कूलों की बेसिक शिक्षा हाशिए पर है। वहीं तमाम शिक्षक ऐसे भी हैं, जो अपनी लगन और मेहनत के बलबूते विद्यालय को न सिर्फ साफ-सुथरा और सुंदर बनाए हुए हैं। साथ ही शिक्षण कार्य उत्तम करके कान्वेंट के छात्र-छात्राओं के जैसी शिक्षा दे रहे हैं। इनके विद्यालयों में छात्र उपस्थिति 90 से 95 प्रतिशत रहती है। सराहनीय कार्यों के लिए बीएसए राजेश वर्मा इन्हें सम्मानित भी कर चुके हैं।
विद्यालय में शिक्षण कार्य से लेकर सामुदायिक सहभागिता सभी मामलों में गुरुजन सामंजस्य बनाकर उत्कृष्ट शिक्षण कार्य कर रहे हैं। इन गुरुजनों को बीएसए के द्वारा सम्मानित भी किया जा चुका है। विद्यालयों में अव्यवस्थाएं और तमाम कार्यों का बहाना बनाकर शिक्षण कार्य से बचने वाले शिक्षकों के लिए ये गुरुजन नजीर हैं। इन्हें किसलिए सम्मानित किया गया। उसकी वजह सहित एक छोटा सा परिचय।
नाम - सुरेंद्र सिंह
विद्यालय -प्राथमिक विद्यालय शाहगंज
वजह- विद्यालय में छात्र-छात्राओं की औसत उपस्थिति 95 प्रतिशत से भी ज्यादा।
नाम - अर्चना श्रीवास्तव
विद्यालय -प्राथमिक विद्यालय जानकीनगर
वजह- डायनिंग शेड, बेंच डेस्क, चहारदीवारी, सबमर्सिबल, टीवी, सीडी प्लेयर, वेल पंप आदि लगवाया।
नाम - ऋषिपाल सिंह
विद्यालय -प्राथमिक विद्यालय वसुलिमा
वजह- विद्यालय में छात्र-छात्राओं की औसत उपस्थिति 95 प्रतिशत से भी ज्यादा।
नाम- अमन अवस्थी (अनुदेशक)
विद्यालय- पूर्व माध्यमिक विद्यालय सरसवां
वजह- पाठ्य सहगामी एवं पाठ्येत्तर गतिविधियों में सर्वोत्तम योगदान।
नाम- गीता शुक्ला
विद्यालय- पूर्व माध्यमिक विद्यालय हथौड़ा
वजह- गाइड टीम का राज्य स्तरीय पुरस्कार जीतने पर।
नाम-रामसेवक शर्मा
विद्यालय- पूर्व माध्यमिक विद्यालय कुरसंडा
वजह- विज्ञान की लैबोरेटरी निर्माण एवं विज्ञान शिक्षा मेें विशेष योगदान।
नाम- शोएब अहमद
विद्यालय- पूर्व माध्यमिक विद्यालय शहबाजपुर
वजह- शहबाजनगर में विज्ञान लैब एवं विज्ञान शिक्षण में विशेष योगदान।
नाम-रामू गुप्ता (शिक्षामित्र)
विद्यालय- प्राथमिक विद्यालय बीबीपुर
वजह-विद्यालय के कायाकल्प को शानदार बनाने में विशेष योगदान।