मिर्जापुर ब्लाक को जलालाबाद से अलग न करने की मांग को लेकर मिर्जापुर बचाओ संघर्ष समिति के बैनर तले बृहस्पतिवार को लोगों का हुजूम सड़कों पर उतर आया। मिर्जापुर क्षेत्र के करीब चार दर्जन ग्राम पंचायतों के प्रधानों के नेतृत्व में जलालाबाद पहुंचे। ग्रामीणों की बार संघ से जुड़े अधिवक्ताओं ने अगुवाई की। इसके बाद याकूबपुर पड़ाव से नारेबाजी करते हुए पदयात्रा निकाली गई।
कस्बे के मुख्य चौराहे पर पहुंचे ये लोग सड़क पर बैठ गए और काफी देर तक धरना दिया। करीब दो किलोमीटर की इस पदयात्रा और चौराहे पर दिए गए धरने के दौरान कटरा-फर्रुखाबाद स्टेट हाईवे पर दोनों ओर काफी देर तक जाम की स्थिति बनी रही और वाहनों में फंसे लोग भीषण गर्मी में बेहाल हो गए।
धरने के बाद पुन: शुरू हुई पदयात्रा नगर के मुख्य बाजार तथा कोतवाली रोड होती हुई तहसील पहुंचकर सभा में तब्दील हो गई। जहां जिपंस आयुश प्रताप सिंह, जिपंस आराधना वर्मा, समिति के अध्यक्ष कृष्णकांत दीक्षित, संयोजक वीरेंद्र सिंह यादव, बार संघ के अध्यक्ष राजीव चंद्र सक्सेना, वरिष्ठ अधिवक्ता अनिल पाठक, विनोद चंद्र शर्मा समेत कई गांवों के प्रधानों ने अपने विचार रखे और सरकार द्वारा मिर्जापुर ब्लाक को जलालाबाद से अलग न किए जाने की घोषणा न करने तक आंदोलन जारी रखने का फैसला लिया। बताते चलें कि नवसृजित तहसील कलान में ब्लाक मिर्जापुर को शामिल किए जाने को लेकर बार संघ तथा मिर्जापुर ब्लाक के कई जिपंस तथा प्रधान बीते कई दिनों से आंदोलनरत हैं।
विरोधी अधिवक्ताओं ने दिया ज्ञापन
बार संघ जहां ब्लाक मिर्जापुर को जलालाबाद से अलग करने का लगातार विरोध कर रहा है वहीं इस संगठन से जुड़े तहसील के कई अधिवक्ता बार संघ के इस निर्णय के विरोध में हैं। इन अधिवक्ताओं ने मुख्यमंत्री समेत कई उच्चाधिकारियों को संबोधित ज्ञापन एसडीएम को दिया। इसमें ब्लाक मिर्जापुर को शामिल कर कलान को तहसील अविलंब बनाए जाने की मांग की गई है। ज्ञापन देने वालों में नरेंद्र सिंह यादव, राममोहन सिंह, श्रीकृष्ण यादव, विजय प्रताप सिंह, ओम सरन यादव, अजय शंकर दीक्षित, अंबुज यादव, योगेश यादव आदि शामिल रहे।