कलान / मिर्जापुर (शाहजहांपुर)। नरौरा बैराज से दो दिन के अंतराल पर निकला तीन लाख क्यूसेक से ज्यादा पानी यहां पहुंचने के साथ गंगा में उफान बढ़ने से विकराल हुई बाढ़ में मंगलवार को जलालाबाद-शमसाबाद स्टेट हाईवे का पांच किमी हिस्सा पूरी तरह डूब गया। लोग करीब डेढ़ फुट पानी से होकर निकले। इसके साथ ही गंगा के तटवर्ती करीब दो दर्जन गांवों के आसपास पानी पहुंच जाने से लोगों में बाढ़ का खौफ बढ़ गया है। इन गांवों के आसपास के खेत फसलों समेत डूब चुके हैं और आबादी के करीब पानी पहुंचने से इन गांवों के टापू में बदलने का खतरा पैदा हो गया है।
पहाड़ों से लेकर मैदानी क्षेत्रों तक हो रही बारिश और पश्चिमी यूपी के बांधों-बैराजों से अतिरिक्त पानी की निकासी का असर गंगा में बढ़ते उफान के तौर पर दिख रहा है। सिंचाई विभाग की रिपोर्ट के अनुसार गंगा अभी खतरे के निशान से 22 सेमी नीचे 143.43 मीटरगेज पर बह रही है, लेकिन बीते 24 घंटे में जलस्तर में हुई सात सेमी वृद्धि से बाढ़ रौद्र रूप लेने लगी है।
शमसाबाद स्टेट हाईवे पर चौरा से नगला बसोला गांव तक पानी आ जाने से आवागमन प्रभावित होने लगा है। इसके बावजूद लोग जान जोखिम में डालकर वहां से निकल रहे हैं। इसी हाईवे से कांवड़िये गंगाजल लेने ढाई घाट जाते हैं। उनकी सुरक्षा के नाम पर पुलिस अधिकारियों ने वहां अस्थायी चौकी बनाकर दो सिपाहियों की ड्यूटी लगाई है, लेकिन पुलिस कर्मी कांवड़ियों को पानी में जाने से रोकने के बजाय बाढ़ का नजारा लेते देखे जा सकते हैं। वहां बाढ़ के खतरे से सचेत करने के लिए कोई चेतावनी बोर्ड भी नहीं लगाया गया है।
मस्जिदनगला, इस्लामनगर, आजाद नगर, कटेला नगला, बांसखेड़ा के अलावा फर्रुखाबाद जिले की सीमा में आने वाले कमथरी, चितार, पैलानी दक्षिण आदि दो दर्जन गांवों के खेत बाढ़ में डूब जाने से वहां बोई गईं गन्ना, धान, बाजरा आदि फसलें चौपट होने का खतरा पैदा गया है।
धिंयरपुरा में बाढ़ से सभी खेत डूब चुके हैं। जलस्तर बढ़ने से अब बाढ़ का पानी खेतों से होकर गांवों के आबादी वाले उन हिस्सों की तरफ बढ़ रहा है, जहां गांव वालों ने अपने पालतू पशु बांधने के लिए फूस की मड़ैया डाल रखी हैं। गंगा का तटीय इलाका टापू जैसा दिखने लगा है।
बाढ़ का जायजा लेने आजादनगर जाने पर वहां के साबिर, नाजिम, नौशाद आदि बेहद परेशान दिखे। सभी का कहना था कि गंगा पूरे उफान पर है और अब पानी बढ़ा तो उन्हें गांव से परिवार और पशुओं सहित पलायन कर ऊंचे मार्गों पर शरण लेनी पड़ेगी।
गंगा में उफान से रामगंगा के तटीय गांवों पर मंडराया बाढ़ का खतरा
जलालाबाद। हर साल गंगा में बाढ़ आने पर उसकी सहायक रामगंगा में भी उफान आने से यहां से लेकर परौर और अल्हागंज के तटवर्ती चार दर्जन गांव पानी से घिर जाते हैं। हालांकि, अभी रामगंगा में बाढ़ के हालात नहीं हैं क्योंकि नदी खतरे के निशान से 2.85 मीटर नीचे 134.45 मीटरगेज पर बह रही है, लेकिन गत वर्षों में बाढ़ से हुई तबाही याद कर तटीय गांवों के लोग परेशान हैं। क्षेत्र की बहगुल और रामगंगा नदी कोलाघाट पुल के पास एक हो जाती हैं। बाढ़ आने पर तटवर्ती गांवों कसारी, नगरा, रैपुरा, मंझरा, अतरी, एलमनगर आदि का टापू में बदलना तय है। चितरऊ, मड़ैया गुजरान, संगहा, कुंडरा, उइला, पहाड़पुर, थाथरमई आदि दो दर्जन गांव इन दोनों नदियों के बीच दोआबे में बसे हैं। बाढ़ आने पर इन गांवों के रास्ते बंद होने के साथ काफी नुकसान होता है, लेकिन वहां बाढ़ रोकने के स्थायी इंतजाम अब तक नहीं हो सके हैं। संवाद
बाढ़ से बचाव के लिए जागरूक करने में जुटी एनडीआरएफ की टीम
जलालाबाद/मिर्जापुर। बाढ़ की स्थिति गंभीर होते देख एनडीआरएफ की टीम राजस्व विभाग के साथ कई गांवों में जाकर लोगों को बचाव के लिए सुरक्षात्मक उपाय बताकर जागरूक करने में जुट गई है। मंगलवार को एनडीआरएफ की टीम ने रामगंगा किनारे बसे पहरुआ गांव में कैंप लगाकर गांव वालों के अलावा स्थानीय नाविकों और तहसील के कर्मचारियों को पानी में फंसने, चोट लगने, सांप के डसने आदि समस्या होने पर बरती जाने वाली सावधानियां बताईं। सोमवार को एनडीआरएफ चितरऊ और खंडहर गांव में भी जागरूकता कैंप लगा चुकी है। इस बीच, राहत कार्य के लिए शासन से मोटर बोट भी उपलब्ध करा दी गई है। प्रशिक्षण टीम की कमांडर एनडीआरएफ की इंस्पेक्टर शिवकली धुर्वे ने बताया कि मोटर बोट पर रस्सी, चाकू, लाठी आदि जरूरी वस्तुएं रखी गई हैं। इस दौरान एसडीएम आशुतोष कुमार सिंह, तहसीलदार सृजित कुमार, ब्लॉक प्रमुख प्रियांशु रघुवंशी आदि मौजूद रहे। संवाद
प्रशासन ने शुरू की तैयारी
जलालाबाद सीओ दीपक कुमार ने बताया कि मिर्जापुर क्षेत्र में बाढ़ से जलमग्न जलालाबाद-शमसाबाद स्टेट हाईवे पर आवाजाही रोकने के लिए वहां अस्थायी पुलिस चौकी बनाने के साथ एक मोटर बोट भी उपलब्ध करा दी गई है। जल्द ही वहां चेतावनी बोर्ड भी लगा दिया जाएगा। बाढ़ प्रभावितों के लिए टेंट और अन्य आवश्यक सामान मंगा लिया है। बाढ़ से घिरने वाले गांवों में खाद्य और राहत सामग्री वितरण के लिए डीएम से वार्ता हुई है। राहत और बचाव कार्य के लिए बुधवार को तीन नावें भी मिल जाएंगी। तटीय गांवों के लोगों को बाढ़ से सतर्क रहने के लिए कहा गया है।
अभी बाढ़ के हालात नहीं हैं। गंगा का जलस्तर मामूली घटा भी है। बाढ़ से बचाव की सभी तैयारी पूरी कर ली गई है। आबादी क्षेत्र में अब तक पानी नहीं आया है। एहतियात बरतते हुए दो नाव लगा दी गईं हैं।
-धर्मेंद्र प्रताप सिंह, डीएम
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गंगा में बाढ़ की स्थिति को देखते हुए बाढ़ चौकियों से लगातार निगरानी की जा रही है। अधिकारियों को निर्देश दिए गए हैं कि निचले क्षेत्र में रहने वाले लोगों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाया जाए। आश्रय स्थल और पशुओं के चारा का इंतजाम किया जा रहा है।
- अरविंद कुमार, एडीएम वित्त एवं राजस्व
जलालाबाद-शमशाबाद स्टेट हाइवे पर चौसा गांव में सड़क पर भरा पानी। संवाद
जलालाबाद-शमशाबाद स्टेट हाइवे पर चौसा गांव में सड़क पर भरा पानी। संवाद