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विदेश से जीवित प्रमाणपत्र जारी कर सकेंगे पेंशनर

Sat, 24 Dec 2016 12:09 AM IST
ब्यूरो, अमर उजाला शाहजहांपुर
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सरकारी विभागों से सेवानिवृत्त होने के बाद बेटे-बेटियों के साथ विदेश में रह रहे पेंशनरों को अब अपने जिंदा होने का सुबूत देने के लिए वतन वापसी कर कोषागार तक दौड़ नहीं लगानी पड़ेगी। वरिष्ठ कोषाधिकारी विशंभर बाबू ने शुक्रवार को ट्रेजरी में डिजिटल जीवित प्रमाणपत्र पटल का फीता काटकर शुभारंभ किया। पेंशनरों को घर बैठे सालाना जीवित प्रमाणपत्र उपलब्ध कराने की सुविधा आरंभ की गई। जिले में केंद्र और राज्य सरकारों के विभिन्न विभागों से जुड़े करीब 13 हजार पेंशनर कोषागार के माध्यम से पेंशन प्राप्त कर रहे हैं। ऑनलाइन प्रमाणपत्र सुविधा केवल उन्हीं पेंशनरों को मिल सकेगी जो पटल पर आकर डिजिटल निशानी अंगूठा देकर अपना रजिस्ट्रेशन कराएंगे। साथ में आधार कार्ड की छाया प्रति और मोबाइल नंबर भी उपलब्ध कराना होेगा। वरिष्ठ कोषाधिकारी ने बताया कि रजिस्ट्रेशन कराने के बाद पेंशनर ऐसे किसी भी लोकवाणी, जनवाणी केंद्र अथवा साइबर कैफे से अपने जीवित प्रमाणपत्र वेबसाइट जीवन प्रमाणन पर दे सकेंगे, जहां थम्ब इंप्रेशन अर्थात अंगूठा निशान लेने वाली मशीन लगी हो। जिन पेंशनरों ने इस वर्ष जीवित प्रमाणपत्र प्रस्तुत कर दिया है, उन्हें दोबारा जमा करने की आवश्यकता नहीं है। इस मौके पर सहायक कोषाधिकारी राजेश गिरि, लेखाकार सीमांत मिश्र आदि ने कई पेंशनरों का डिजिटल पटल पर पंजीकरण कराया। वरिष्ठ कोषाधिकारी ने राज्य सरकार द्वारा पेंशनरों के लिए सातवें वेतन आयोग की सिफारिशें लागू होने की जानकारी देते हुए बताया कि शुक्रवार को प्राप्त नवीनतम शासनादेश के अनुसार न्यूनतम पेंशन 3500 रुपये से बढ़कर 9000 हो गई है। इसी तरह उपादान मद में ग्रेज्युटी की अधिकतम सीमा दस लाख से बढ़ाकर 20 लाख रुपये कर दी गई है और दुर्घटना से मृत्यु होने पर अधिकतम 25 लाख रुपये उपादान मिल सकेगा। इस मौके पर कोषाधिकारी अमरेश बहादुर पाल, वित्त एवं लेखाधिकारी बेसिक शिक्षा संतोेष कुमार, सहायक कोषाधिकारी रवि शंकर शर्मा, अनूप कुमार, लेखाकार चंद्रपाल सिंह आदि मौजूद रहे।
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