शाहजहांपुर। राष्ट्रीय वृद्धावस्था पेंशन में घोटाले की जांच अब शासन स्तर से गठित टीम करेगी। समाज कल्याण निदेशालय ने संयुक्त निदेशक की अगुवाई में डिप्टी डायरेक्टर और सीनियर ऑडिटर की टीम बनाई है। वहीं पूरे घोटाले में समाज कल्याण अधिकारी राजेश कुमार की बड़ी भूमिका सामने आने के बाद बृहस्पतिवार को सीडीओ की संस्तुति पर निदेशालय ने उन्हें निलंबित कर दिया। राजेश कुमार अभी तक जिले के अधिकारियों के संपर्क में नहीं आए हैं। बृहस्पतिवार को बरेली से आए डिप्टी डायरेक्टर ने विभागीय कर्मचारियों से अभिलेख प्राप्त किए।
वृद्धावस्था पेंशन पाने वाले बुजुर्गों के खाते में हेरफेर कर दूसरे खाते दर्ज कर दिए गए थे। इसके बाद उनसे रुपये भी निकाल लिए गए, जबकि लाभार्थी के खाते में कुछ नहीं आया। माना जा रहा है कि ऐसे खातों की संख्या चार हजार से ज्यादा है, जिनमें हेरफेर किया गया है।
पेंशन खाते में न आने से परेशान बुजुर्गों ने जब शिकायत की तो प्रशासन ने कमेटी बनाकर जांच शुरू कराई। सैंपल के तौर पर टीम ने 11 बुजुर्गों के खाते की जांच की, जिसमें घोटाले की पुष्टि हो गई। बैंक खातों को बदलने का अधिकार केवल समाज कल्याण अधिकारी को ही होता है। उनको दिए गए डोंगल से ही खाता नंबर बदला जा सकता है।
जांच रिपोर्ट मिलने के बाद सीडीओ ने समाज कल्याण अधिकारी राजेश कुमार के निलंबन की संस्तुति निदेशक से की थी। बृहस्पतिवार शाम प्रशासन के पास उनको निलंबित किए जाने का आदेश आ गया। बड़ा घोटाला सामने आने के बाद समाज कल्याण निदेशालय ने जांच टीम गठित कर दी है।
संयुक्त निदेशक अरुण कुमार पांडेय की अध्यक्षता में डीडी अजयवीर सिंह यादव, सीनियर ऑडिटर नीरज मद्धेशिया शुक्रवार को जांच करने के लिए शाहजहांपुर आएंगे। टीम एक हफ्ते में अपनी जांच पूरी करेगी। सीडीओ एसबी सिंह ने बताया कि समाज कल्याण अधिकारी को निलंबित कर दिया गया है।
अभिलेख जुटाने पहुंचे डिप्टी डायरेक्टर
समाज कल्याण विभाग के डिप्टी डायरेक्टर अजयवीर सिंह बृहस्पतिवार शाम समाज कल्याण विभाग पहुंचे। उन्होंने कर्मचारियों से पेंशन संबंधी अभिलेख मांगे। कर्मचारियों ने बताया कि समाज कल्याण अधिकारी नहीं हैं। ऐसे में उपलब्ध थोड़े-बहुत अभिलेख उन्होंने डीडी को सौंपे। काफी देर तक डीडी बाबुुओं से बातचीत करते रहे और घोटाले के बारे में जानकारी जुटाई।
वह अपने साथ पेंशनर्स का रिकाॅर्ड भी लेकर आए थे। बृहस्पतिवार को दिनभर विभाग के दफ्तर में सन्नाटा पसरा रहा। कुछ लोग जानकारी लेने के लिए कार्यालय आए लेकिन किसी के न मिलने पर मायूस लौट गए। वहीं लंच के बाद कुछ कर्मचारी दफ्तर पहुंचे और विभागीय कामकाज निपटाया।
एनआईसी ने 22 से 23 सौ खातों में मानी हेराफेरी
प्रशासनिक टीम ने जांच रिपोर्ट तैयार कर डीएम को सौंप दी थी। इसके बाद रिपोर्ट समाज कल्याण निदेशालय भेजी गई। समाज कल्याण अधिकारी के न मिलने के कारण निदेशालय ने एनआईसी (राष्ट्रीय सूचना विज्ञान केंद्र), लखनऊ से जांच कराई। प्राथमिक तौर पर इसमें 22 से 23 सौ खाते ऐसे मिले हैं जिनमें हेरफेर किया गया है। हालांकि यह संख्या इससे कहीं ज्यादा होगी।
बुजुर्गों की पेंशन हड़पने के पीछे बड़ा रैकेट
22 से 23 सौ खातों में फेरबदल करना एक-दो व्यक्ति के बस का नहीं है। इसमें एक बड़े रैैकेट का शामिल होना सामने आ रहा है। अब तक प्रशासनिक कवायद जांच के ईद-गिर्द ही घूम रही है। ऐसे में एफआईआर दर्ज न होने से रैकेट से जुड़े लोगों को भागने का मौका मिल सकता है। माना जा रहा है कि यह गैंग जनसेवा केंद्रों की सहायता से गांव-गांव जाकर धोखाधड़ी करने के लिए लोगों के बैंक खाते एकत्र करता है। अधिकारी भी मानते हैं कि इतनी बड़े रैकेट को पकड़ने के लिए जांच के साथ ही धरपकड़ तेज करने की भी जरूरत है। एफआईआर होने पर गिरफ्तारी की तलवार समाज कल्याण अधिकारी पर भी लटकेगी।
अफसरों को गुमराह करते रहे समाज कल्याण अधिकारी
अफसरों को जिला समाज कल्याण अधिकारी राजेश की लोकेशन नहीं मिल रही है। सीडीओ श्याम बहादुर सिंह ने बताया कि उनके पास समाज कल्याण अधिकारी का मेसेज आया था, जिसमें उन्होंने बृहस्पतिवार को आने की बात कही थी। वह अब तक नहीं आए हैं। इससे पहले वह चार मार्च को लखनऊ में विभागीय बैठक का हवाला देते हुए जिले से गए थे।
उन्होंने अपना स्वास्थ्य खराब होने की बात भी बताई थी। वहीं जब घोटाला सामने आने पर सीडीओ ने लखनऊ में समाज कल्याण विभाग से जानकारी की तो उन्हें बताया गया कि ऐसी कोई मीटिंग नहीं बुलाई गई है। विभाग के डायरेक्टर खुद नोडल अधिकारी के रूप में मथुरा में थे। जांच कमेटी ने भी जब समाज कल्याण अधिकारी से संपर्क करने का प्रयास किया तो नहीं हो सका।
ऐसे में समाज कल्याण अधिकारी की भूमिका पर शक गहराता जा रहा है। प्रशासनिक अधिकारियों के मुताबिक समाज कल्याण अधिकारी जांच में कोई सहयोग नहीं कर रहे हैं। उनके डोंगल से जांच टीम को काफी जानकारी मिल सकती है लेकिन वह भी उनके पास ही है। सूत्रों के मुताबिक समाज कल्याण अधिकारी ने विभागीय डोंगल के अलावा भी पेंशन के लिए अलग से डोंगल बना रखा है।
54 पेज की जांच रिपोर्ट में 11 खातों में हेरफेर
सीडीओ के निर्देशन में जिला विकास अधिकारी पवन कुमार सिंह, जिला कृषि अधिकारी डॉ. सतीश चंद्र पाठक, वरिष्ठ कोषाधिकारी शैलेंद्र प्रताप सिंह और अग्रणी बैंक प्रबंधक दीपक चंद्रा की टीम ने जांच शुरू की। बुधवार रात जांच टीम ने 54 पन्ने की अपनी रिपोर्ट डीएम को सौंप दी। नमूने के तौर 11 खातों की जांच की गई। इनमें हेरफेर किया गया था। जांच में सहयोग न करने और भूमिका संदिग्ध मिलने पर सीडीओ ने रात में ही प्रमुख सचिव को समाज कल्याण अधिकारी के निलंबन की संस्तुति कर दी थी। राजेश कुमार के निलंबन के बाद समाज कल्याण अधिकारी विकास वंदना सिंह को चार्ज सौंपा गया है।
बुजुर्गों की बातचीत
एक साल तक पेंशन आई। दो साल से बंद है। बैंक जाने पर पता चला कि समाज कल्याण विभाग ने खाते पर रोक लगा दी है। पेंशन भी नहीं आ रही। कई बार ब्लॉक में समस्या बताई लेकिन कोई समाधान नहीं हुआ। खाते में कुछ रुपये हैं। वह भी नहीं निकल रहे। - महेंद्र पाल, नौगवां गोविंदपुर
दो साल से किसी और के खाते में पेंशन जा रही है। सही जानकारी देने वाला कोई नहीं है। रजिस्ट्रेशन हमारे नाम पर है जबकि खाता दूसरे का है। हमारे नाम पर पेंशन आती है लेकिन निकालता कोई और है। - रामशंकर मौर्य, बझेड़ा भगवानपुर
खाते में गए और निकल भी गए रुपये
बुजुर्गों की पेंशन में डकैती पूरे शातिराना ढंग से की गई है। डभौरा के रहने वाले एजाज का खाता नंबर बदला गया। खाता बिलवा गांव के रहने वाले देवव्रत का डाल दिया गया। खाता सक्रिय न होने के कारण रुपये नहीं निकल सके। वहीं बांसखेड़ा गांव की रहने वाली बानो के खाते को पुनक पत्नी चंद्रपाल के खाते से बदल दिया गया। इस खाते से पेंशन के तीन हजार रुपये निकल भी गए। इसी तरह से अन्य खातों के साथ हेरफेर कर रुपये भी निकाल लिए गए हैं।
समाज कल्याण अधिकारी के न होने से कार्यालय में पसरा सन्नाटा । संवाद