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मटर और आलू ने तोड़ दी किसानों की कमर

Fri, 13 Jan 2017 11:21 PM IST
अमर उजाला ब्यूरो पुवायां/खुटार।
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घाटा - फोटो : अमर उजाला
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प्रति एकड़ 10 से 20 हजार रुपये का हो रहा घाटा
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लागत भी नहीं लौटने से बढ़ गई तमाम दिक्कतें
 इस साल आलू और मटर की फसल ने किसानों की कमर तोड़ दी है। हालत यह है कि किसानों को लागत लौटना तो दूर प्रति एकड़ 10 से 20 हजार रुपये का घाटा हो रहा है। ऐसे में किसान कर्ज बढ़ने की चिंता में डूबे हैं। 
पिछले साल तमाम किसानों ने मटर की खेती की थी। मटर की फली खेत से ही प्रति एकड़ 30 से 35 हजार रुपये तक बिकी थी। मटर खरीदने वाले व्यापारियों ने मटर को खुद ही अपने मजदूर लगाकर तुड़वाया भी था। मटर की खेती में अच्छा लाभ देखकर इस साल क्षेत्रफल में बढ़ोत्तरी की गई, लेकिन इस समय मटर की फली के रेट प्रति एकड़ 10 हजार रुपये तक ही मिल रहे हैं। इस पर भी व्यापारी किसानों से मटर को तुड़वाकर देने की बात कह रहे हैं। चेक से भुगतान लेने पर रेट 18 से 20 हजार रुपये तक लग रहे हैं, लेकिन तमाम किसान चेक का भुगतान फंसने पर सारी रकम गवां बैठने को लेकर आशंकित हैं। मटर की खेती पर प्रति एकड़ 20 से 25 हजार रुपये का खर्च आया है। ऐसे में भारी घाटे की आशंका ने किसानों की नींद उड़ा दी है।
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इसी प्रकार आलू के रेट में भी भारी गिरावट आई है। आलू की खेती में प्रति एकड़ 30 से 35 हजार रुपये की लागत आई है, जबकि रेट कम होने के कारण प्रति एकड़ आलू बिक्री से 25 हजार रुपये तक ही हाथ आ रहे हैं। आलू में भी भारी घाटा हुआ है। इस पर भी व्यापारी आलू ले जाकर बाजार में बिक्री कर रुपये देने की बात कह रहे हैं। नगद रुपये नहीं मिलने से भी किसान बेहद परेशान हैं।

आलू के रेट तो घटते बढ़ते रहते हैं, लेकिन मटर के रेट प्रति एकड़ 40 से 60 हजार रहते थे, लेकिन इस बार 10 से 20 हजार रुपये ही मिल रहे हैं। इसका एक बड़ा कारण नोटबंदी भी है। फसल के लिए कर्ज लेने से हालात ज्यादा खराब हो चले हैं। 
- बलदेव सिंह, कोचर फार्म खुटार

किसान हर तरफ से मारा जा रहा है। कोई भी सरकार रहे किसानों के कल्याण के लिए उचित कदम नहीं उठाती है। किसान के कल्याण की बातें कागजों तक ही सीमित हैं। मटर और आलू में भारी घाटे पर ध्यान देने की जरूरत है।
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- अनिल सिंह यादव, तहसील अध्यक्ष भाकियू पुवायां

किसान के कल्याण की बात कौन सोचता है। नेता संसद और विधानसभा में अपने वेतन, भत्ते बढ़ाने पर तुरंत एकजुट हो जाते हैं। बैंकों में फसल बीमा के नाम पर जबरिया रुपये काटे जा रहे हैं, लेकिन फसल खराब होने पर बीमा लाभ नहीं मिल पा रहा है। 
- महेंद्रपाल, जिलाध्यक्ष भाकियू शाहजहांपुर
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