शाहजहांपुर। सिर में चोट लगने समेत न्यूरो की तमाम बीमारियों के मरीजों को बड़ी राहत देने वाली खबर है। कॉलेज में न्यूरो के मरीजों के उपचार की व्यवस्था शुरु हो गई है। न्यूरो सर्जरी भी शुरु कर दी गई है। अब तक हेड इंजरी, ब्रेन टीबी, ब्रेन ट्यूमर आदि के मरीजों की सर्जरी सफलतापूर्वक की जा चुकी है।
अजीजगंज स्थित मेडिकल कॉलेज में एक हजार से ज्यादा मरीज रोजाना ही ओपीडी में आते हैं। इसी तरह ट्रॉमा सेंटर में सौ से डेढ़ सौ मरीजों को भर्ती किया जाता है। इन मरीजों में हादसा होने पर किसी के सिर पर चोट लगने, खून का थक्का जमने, ब्रेन टीबी होने पर न्यूरो सर्जन की तैनाती नहीं होने से उपचार नहीं मिल पाता था।
मेडिकल कॉलेज से उन्हें लखनऊ रेफर कर दिया जाता था। ऐसे में मरीजों का समय के साथ खर्च भी काफी अधिक हो जाता था। गंभीर मरीजों की जान पर बन आती थी। प्राचार्य डॉ. राजेश कुमार के प्रयास से मेडिकल कॉलेज को न्यूरो सर्जन मिल गया है।
उन्होंने बताया कि आगरा से आए न्यूरो सर्जन डॉ. शाकिर ने ज्वाइन करने के बाद मरीजों को सेवाएं देना शुरू कर दी हैं। सर्जरी विभाग के अधीन रहकर हेड इंजरी, ब्रेन टीबी, ब्रेन ट्यूमर समेत आठ ऑपरेशन कर चुके हैं।
दो दिन की ओपीडी में पहुंच रहे 200 तक मरीज
मेडिकल कॉलेज की ओपीडी में मरीजों को लाभ मिलने लगा है। न्यूरो सर्जन दो दिन ओपीडी में सेवाएं दे रहे हैं। मंगलवार को उनकी ओपीडी में करीब 150 व शुक्रवार को 50-60 मरीज आते हैं। दोनों दिन की ओपीडी में लगभग 200 से अधिक मरीज पहुंच रहे हैं। अस्पताल में अभी स्पाइन यानी रीढ़ का उपचार शुरू नहीं हो सका है। इसका सेटअप नहीं होने के कारण सर्जरी शुरू नहीं हो पा रही है। हालांकि तैयारियां शुरू कर दी गईं हैं।
पहले औसतन रोजाना दो-तीन मरीज किए जाते थे रेफर
न्यूरो सर्जन न होने के कारण हादसे में सिर पर गंभीर चोट लगने से घायल व्यक्तियों को हायर सेंटर रेफर कर दिया जाता था। रोजाना दो-तीन ऐसे मरीज पहुंचते थे। गंभीर रूप से घायल होने के कारण सफर के दौरान ही कई लोगों की मौत हो जाती थी। अब गंभीर मरीजों की राजकीय मेडिकल कॉलेज में ही सर्जरी की जा सकेगी।
तैनाती के बाद अब तक आठ सर्जरी कर चुके हैं। ओपीडी में सप्ताह में दो बार सेवाएं देते हैं। जनपद के लोगों को न्यूरो सर्जरी के लिए भटकना नहीं पड़ेगा। उन्हें अब आसानी से उपचार मिल सकेगा। - डॉ.शाकिर, न्यूरो सर्जन, राजकीय मेडिकल कॉलेज
मेडिकल कॉलेज में न्यूरो सर्जन पूर्व में तैनात नहीं थे। सर्जन की तैनाती के लिए पिछले कई साल से प्रयास कर रहे थे। न्यूरो सर्जन की तैनाती होना एक उपलब्धि है। इससे शहर के मरीजों को बड़े शहरों में उपचार के लिए नहीं जाना होगा। -डॉ. राजेश कुमार, प्राचार्य, राजकीय मेडिकल कॉलेज
राजकीय मेडिकल कॉलेज का ट्रॉमा सेंटर। संवाद
राजकीय मेडिकल कॉलेज का ट्रॉमा सेंटर। संवाद