परिषदीय स्कूलों में यूं तो सारे इंतजाम ही बदहाल हैं लेकिन शौचालयों और पानी की व्यवस्था तो बेहद दयनीय है। अधिकांश स्कूलों में शौचालय और पेयजल की व्यवस्था बदहाल है। बच्चे पानी के लिए आसपास के घरों में हैंडपंप तलाशते घूमते हैं। हाईकोर्ट ने प्राइमरी स्कूलों की दुर्दशा पर कड़ी नाराजगी जताते हुए सरकार को दिशा निर्देश दिए हैं। स्कूलों में मूलभूत सुविधाएं विशेषकर टॉयलेट और पीने के लिए शुद्ध पानी मुहैया कराने पर सरकार को फोकस कर तत्काल व्यवस्थाएं करने के आदेश दिए गए हैं। बृहस्पतिवार को खुटार क्षेत्र में सरकारी स्कूलों का जायजा लिया तो शौचालय और पानी की स्थिति बेहद खराब दिखी। शौचालयों का तो हाल यह है कि ज्यादातर जर्जर हैं। कुछ के आसपास इतनी घनी झाड़ियां हैं कि उनमें सांप-बिच्छू विचरण करते हैं। जो शौचालय ठीक हैं, वे सिर्फ शिक्षकों के उपयोग के समय ही खोले जाते हैं। बाकी समय में उनमें ताले लटके रहते हैं।