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पंचायत राज: 16 दिन में 25 लाख ठिकाने लगाने का लक्ष्य

Sun, 15 Mar 2015 11:21 PM IST
शाहजहांपुर।
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चालू वित्त वर्ष समाप्त होने से पहले अन्य विभागों की तरह पंचायत राज विभाग ने भी बजट की अवशेष धनराशि ठिकाने लगाने की मुहिम छेड़ दी है। वित्त वर्ष के शेष बचे 16 दिन में 450 शौचालयों समेत बंडा गांव में पंचायत घर बनाने के लिए विभाग ने 25.40 लाख रुपये की बजट राशि खर्च करने की ठानी है। ऐसे में कामों की गुणवत्ता को लेकर लोगों में संदेह पैदा होने लगा है।
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ग्रामीण क्षेत्रों में स्वच्छता को बढ़ावा देने के लिए भारत सरकार के निर्मल भारत अभियान को बीते वर्ष दो अक्तूबर को स्वच्छ भारत अभियान में मर्ज किया जा चुका है। तब से अब तक जिले में 22006 लक्ष्य के सापेक्ष 17656 शौचालय बन पाए हैं। शौचालय बनाने का लक्ष्य मिल चुका है। चालू वित्त वर्ष की बात करें तो केंद्र सरकार द्वारा मनरेगा मद से निर्माण बजट में अपनी हिस्सेदारी बढ़ाने पर भी करीब 450 शौचालय बनने बाकी हैं।


बंडा में पंचायत घर की खड़ी नहीं हुईं दीवारें  
चालू वित्त वर्ष में भावलखेड़ा ब्लॉक के गांव चौढ़ेरा और बंडा ब्लॉक की ग्राम पंचायत बंडा में दस-दस लाख रुपये की लागत से दो पंचायत घर बनवाने का लक्ष्य पूरा नहीं हो सका। चौढ़ेरा मेें बिल्डिंग बनने के बाद फर्श की लीपपोती हो रही है। उधर, बंडा में अभी तक पंचायत घर की दीवारें तक खड़ी नहीं हो पाईं। अभी केवल नींव भराई और मिट्टी कार्य हो रहा है।
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421 स्कूलों के शौचालय सिर्फ दिखावटी   
जिले केे 421 परिषदीय स्कूलों के शौचालय इस्तेमाल लायक ही नहीं हैं। नगर क्षेत्र के 17 परिषदीय स्कूलों में शौचालय बनाने की जगह नहीं है। इसमें किराए के भवनों में संचालित हो रहे शहर के 10 और तिलहर के सात विद्यालय शामिल हैं। देहात क्षेत्र के 315 प्राथमिक स्कूल, 104 उच्च प्राथमिक स्कूलों के साथ ही नगर क्षेत्र के दो स्कूलों के शौचालय मरम्मत करने के योग्य हैं।


केंद्रांश के 6.93 करोड़ खर्च, 70 लाख राज्यांश बकाया
लक्ष्य केमुताबिक शौचालय बनाने केलिए शासन से अभी तक 75 फीसदी धनराशि मिल पाई है। इसके लिए 6.93 करोड़ रुपये केंद्रांश के खर्च हो चुके हैं। विभागीय सूत्रों के अनुसार केंद्रांश मद में बकाया एक करोड़ 62 लाख 82 हजार रुपये की धनराशि बीते जनवरी माह में मिल सकी जो कि लाभार्थियों के खाते में भेज दी गई, लेकिन राज्यांश मद में बकाया 70 लाख रुपये नहीं मिल पाने से वही लाभार्थी शौचालय बनवा पा रहे हैं जिनकी आर्थिक स्थिति मजबूत है। बंडा के पंचायत घर के निर्माण में देरी की भी यही वजह बताई जा रही है।


ग्राम पंचायतों के कामों पर खामोश हैं ग्रामीण
शौचालय और पंचायत भवनों के निर्माण केलिए संबंधित ग्राम पंचायतों को ही कार्यदायी संस्था नामित किया गया है। इसलिए शौचालयों के लाभार्थी निर्माण अपनी निगरानी में कराते हैं और काम की गुणवत्ता में कोई कमी होने पर भी ग्राम प्रधान और पंचायत सेक्रेटरी के खिलाफ मुंह खोलने से कतराते हैं। उन्हें यह डर सताता है कि आपत्ति करने पर कहीं उनका नाम लाभार्थी सूची से न हटा दिया जाए।


पैना, शाहगंज और घुसगवां में बनेंगे शौचालय
प्रदेश के पंचायती राज मंत्री कैलाश यादव के अनुसार नगर विधानसभा क्षेत्र की न्याय पंचायत पैना बुजुर्ग, शाहगंज और घुसगवां से संबंधित गांवों में शौचालय बनने प्रस्तावित हैं। उन्होंने यह जानकारी नगर विधायक सुरेश कुमार खन्ना द्वारा विधानसभा में पूछे गए एक प्रश्न के उत्तर में दी है।


गुणवत्ता की हो रही निगरानी: डीपीआरओ
डीपीआरओ चंद्रिका प्रसाद के अनुसार खनन पर प्रतिबंध से रेत की उपलब्धता में कमी, मनरेगा से केंद्रांश और राज्यांश मिलने में हुई देरी आदि कारणों से काम पिछड़े। इसके बावजूद निर्माण कार्यों की सोशल ऑडिट, तकनीकी जांच आदि कई स्तरों से निगरानी हो रही है। उन्होंने कहा कि पंचायत घरों के काम पर भी निगरानी रखी जा रही है जबकि इसके लिए बजट राशि शासन स्तर से सीधे ग्राम पंचायतों के खातों में भेजी गई है।  
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