भैंसी नदी पुनर्जीवन अभियान के तहत लोकभारती की ओर से पदयात्रा में शामिल लोग। स्रोत आयोजक
पुवायां। गोमती की सहायक नदी भैंसी के पुनर्जीवन के लिए मंगलवार को पदयात्रा शुरू हो गई। इस नदी की कुल लंबाई लगभग 85 किमी है। इतनी ही दूर पैदल चलने के बाद यात्रा का समापन 28 अप्रैल को पन्नघाट पर होगा।
भैंसी नदी कई वर्षों से सूखी पड़ी है। इसका मुख्य कारण नदी भूमि पर कब्जे, नदी के जलस्रोत और तालाबों पर कब्जे कर खेती किया जाना है। लोकभारती संस्था पहले भी भैंसी नदी के पुनर्जीवन के लिए अभियान चला चुकी है। मंगलवार को भैंसी के प्रमुख जलस्रोत पूरनपुर क्षेत्र के शारदा नहर के डंडोल पुल के पास से यात्रा का शुभारंभ किया। यहां के सिद्धबाबा आश्रम के पास के झाबर से भैंसी को काफी पानी मिलता था। इस मौके पर गोरक्ष पीठ से जुड़े योगी हनुमतनाथ ने पहुंचकर पदयात्रियों को आशीर्वाद दिया। दोपहर में बंडा के गांव नवादा में चौपाल और जागरूकता कार्यक्रम का आयोजन किया गया।
पदयात्रा में शामिल लोकभारती के राष्ट्रीय सह सचिव नीरज सिंह ने बताया कि पहले दिन टीम ने दो तकनीकी रिपोर्ट भी तैयार की हैं। जांच में पाया गया कि शारदा नहर से जल रिसाव होकर सिद्धबाबा के पास झाबर में आता है। यहां से जल नदी में जाता था। बाहर से आकर बसे किसानों ने अपने खेतों को पानी से बचाने के लिए अवैध खोदाई कर जलधार की दिशा को मोड़ दिया, जिससे नदी में पानी आना बंद हो गया। गांव नवादा के पास जलधार का नामोनिशान तक नहीं है। नभीची के पास जलधार के निशान हैं, लेकिन पानी नहीं है।
पदयात्री रात में बंडा के गांव रसूलापुर में रात्रि विश्राम करेंगे और गांव के लोगों के साथ बैठक कर भैंसी को जीवनदान के बारे में जागरूक करेंगे। पदयात्रा में पहले दिन राजीव सिंह, विहिप के जिलाध्यक्ष केके गुप्ता, प्रमोद सिंह, उदयराज चौहान, सुधीर सिंह, देवेश गंगवार, राजदीप सिंह, संतकुमार सिंह, उत्कर्ष शुक्ला, रज्जन शुक्ला, संजय त्रिपाठी सहित तमाम लोग मौजूद रहे।