कांट। धान पौध की रोपाई का दौर शुरू होने के साथ किसानों में खाद, विशेषकर यूरिया की मांग बढ़ गई है। हालांकि, यूरिया की जमाखोरी रोकने के लिए स्थानीय सहकारी समिति के गोदाम से केवल उन्हीं किसानों को उनके रकबे के अनुसार यूरिया दी जा रही है, जिन्होंने फार्मर रजिस्ट्री करा ली है।
खास यह है कि वे किसान फार्मर रजिस्ट्री कराने से बच रहे हैं, जिनकी पुश्तैनी जमीनों का बंटवारा होने पर एक ही परिवार के सगे भाई, पिता-पुत्र आदि कई सदस्य प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि योजना का लाभ ले रहे हैं। ऐसे लोगों को भय है कि फार्मर रजिस्ट्री कराने पर सम्मान निधि के लाभार्थियों की सूची से उनका नाम कट जाएगा।
फार्मर रजिस्ट्री नहीं कराने वाले किसानों को शासन से निर्धारित दर पर यूरिया नहीं मिल पा रही है। मजबूरी में उन्हें फुटकर उर्वरक विक्रेताओं से महंगे दाम पर यूरिया खरीदनी पड़ रही है। एआर कोऑपरेटिव गणेश गुप्ता ने बताया कि किसानों को फार्मर रजिस्ट्री पर दर्ज कृषि क्षेत्रफल के अनुसार खाद दी जा रही है।
बिना फार्मर रजिस्ट्री कराए खाद नहीं दी जाएगी। जनपद की सभी समितियों पर पर्याप्त खाद उपलब्ध है। किसानों को प्राथमिकता से फार्मर रजिस्ट्री बनवानी चाहिए। इसमें कोई झंझट नहीं है और आसानी से बनवाई जा सकती है। संवाद