जलालाबाद के उबरिया गांव में आग से जलकर टूटा दीवार व छत का प्लास्टर। संवाद
जलालाबाद। गांव उबरिया में गैस सिलिंडर में आग लगने की घटना को 24 घंटे बीत चुके हैं, लेकिन 40 मिनट के उस अफरा-तफरी भरे मंजर की दहशत पीड़ित के अलावा उनके पड़ोसी परिवार के लोगों के चेहरों पर अब भी है। प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार गनीमत रही कि सिलिंडर फटा नहीं, अन्यथा हादसा और भी भयावह हो सकता था। आग से झुलसे चार लोगों में से एक की हालत गंभीर बनी हुई है।
गांव के प्रेमपाल के जिस घर में यह घटना हुई, वह काफी छोटा है और वहां तक जाने को बमुश्किल दो फुट चौड़ा रास्ता है। हादसे के वक्त घर मेहमानों से भरा हुआ था। रविवार शाम चार बजे घर की दाहिनी ओर बने जीने के नीचे खाना बन रहा था। अचानक पाइप में लगी आग सिलिंडर ने पकड़ ली। चीख-पुकार मचने पर पड़ोसी उस तरफ दौड़े लेकिन रास्ता तंग होने के कारण पूरी तरह मदद नहीं कर पाए। प्रेमपाल के बेटे पिंटू ने बताया कि परिवार के लोग जलता सिलिंडर छोड़कर बाहर भाग सकते थे लेकिन सिलिंडर फटने से घर के अलावा आसपास के घरों में भी आग लग जाने का डर सता रहा था। इसी कारण बहन स्मिता, भाई आगम सहित अन्य परिजन अपनी जान की परवाह किए बगैर रजाई, कंबल, चादर के सहारे आग पर काबू पाने की कोशिश में जुटे रहे।
पड़ोसी बाहर से रेत व मिट्टी लाकर उस पर फेंकने का काम कर रहे थे। इसके बाद भी आग बुझा पाने में करीब 40 मिनट का समय लग गया। पड़ोसी शकुंतला, अहिबरन आदि ने बताया कि सिलिंडर से निकली आग की लपटें छत को छू रहीं थीं। आग से दीवार व लिंटर का प्लास्टर चटककर गिर रहा था।
छत में लगा पंखा तक जल गया। पिंटू ने बताया कि आग बुझाने में उसकी शादीशुदा बहन स्मिता, चाचा अरविंद का 14 साल का बेटा आगम, चाचा हरिओम तथा उनकी माता वीरमती गंभीर रूप से झुलस गए। सभी घायलों को राजकीय मेडिकल काॅलेज ले जाया गया। बताया कि स्मिता की हालत काफी नाजुक है।
जलालाबाद के उबरिया गांव में आग से जलकर टूटा दीवार व छत का प्लास्टर। संवाद