जलालाबाद। कोलाघाट में रामगंगा और बहगुल नदी पर बने पैंटून पुल को हटाने की तिथि नजदीक आ रही है। बावजूद करीब ढाई साल के बाद भी पक्के पुल का निर्माण शासनादेश न आने के इंतजार में लटका हुआ है। 15 जून के बाद पैंटून हटने से स्थानीय लोगों को नदी पार करने के लिए नाव या 70 किमी अतिरिक्त चक्कर लगाकर गुजरना होगा।
150 करोड़ की लागत से नए पुल का प्रस्ताव भेजा गया था। वर्तमान में पैंटून पुल तक पहुंचने के लिए बने मार्ग पर चलना भी यात्रियों के लिए जोखिम से भरा हुआ है। भीषण गर्मी, धूप और धूल के उड़ते गुबार के बीच की यह दूरी तय करना किसी सजा से कम नहीं है। इस अस्थायी रास्ते को चलने लायक बनाने के प्रयास नहीं हुए।
अस्थायी रास्ते पर रेतीले और ऊबड़खाबड़ स्थानों पर लोहे के पटले डाले गए थे जो खिसककर पक्के पुल के नीचे पहुंच चुके हैं। लंबे समय से उन्हें सही नहीं किया गया। इससे करीब चार किलोमीटर के रास्ते पर जगह-जगह बने गड्ढे आने-जाने वालों के लिए मुसीबत बने हुए हैं। तपती दोपहरी में रेत या गड्ढे में वाहन के फंसने पर अक्सर यहां जाम लग जाता है। पक्का पुल न होने से बदायूं व दिल्ली तक रोडवेज बस सेवा ठप पड़ी है। आम आदमी को जिला मुख्यालय से जुड़ी स्वास्थ्य तथा शिक्षा की सेवाओं का लाभ मिल पाना बहुत मुश्किल हो रहा है।
व्यापारी और किसान सबसे ज्यादा परेशान
पक्का पुल न होने से व्यापारी और किसान सबसे ज्यादा परेशान है। उनका माल फर्रुखाबाद के राजेपुर होकर आता-जाता है। बड़े वाहन चालकों को यहां पहुंचने के लिए करीब 60 और कलान तक 70 किलोमीटर का चक्कर लगाना होता है। इससे सामान की लागत भी बढ़ जाती है। यही समस्या किसानों के सामने भी है। वह अपनी उपज औने-पौने दामों पर गांव में बेच दें या उसे फर्रुखाबाद या बदायूं लेकर जाएं।
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अव्यवस्था का तीन साल से झेल रहे दंश
कटरी की जीवन रेखा कहे जाने वाले कोलाघाट का पक्का पुल करीब 15 साल पहले 43 करोड़ की लागत से बना था। 29 नवंबर 2021 को पिलर धंस जाने से कोलाघाट का यह पुल दो टुकड़ों में बंट गया। एक साल से कम समय में करीब साढ़े छह करोड़ की लागत से क्षतिग्रस्त हिस्से का निर्माण कर दिया गया। केंद्रीय सड़क अनुसंधान संस्थान समेत विभिन्न जांच एजेंसियों की रिपोर्ट में पुल की डिजाइनिंग से लेकर इसके निर्माण में बरती गई लापरवाही को उजागर किया गया था। इस पुल पर आवागमन पूरी तरह से असुरक्षित करार दिया गया था। आवागमन की दिक्कत को देखते हुए पीडब्ल्यूडी ने पैंटून पुल तथा अस्थायी रास्ते का निर्माण कर दिया था। पिछले तीन सालों से इसी व्यवस्था के भरोसे आवागमन होता आ रहा है।
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सब्जी के कारोबार से जुड़ा हूं। पुल न होने से अन्य जनपदों की बाजार से थोक में जो सब्जी लाते हैं, उसके लिए दो-तीन लोग मिलकर गाड़ी कर लेते हैं। माल कम लाने के कारण आमदनी घटी है। जलालाबाद की मंडी से व्यापार करना आसान था।
रामखिलावन, कलान
हर साल आने वाली बाढ़ से अन्य फसलों को बचा पाना काफी मुश्किल होता है। हम लोग पालेज की खेती करके खासी आमदनी कर लेते थे। पुल की वजह से अब बाहर का व्यापारी यहां खरीदारी करने नहीं आता इसलिए बड़े पैमाने पर यह खेती बंद है।
नन्हेंलाल, बीघापुर
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- एप्रोच रोड पर धूल से बचाव के लिए सुबह-शाम छिड़काव कराया जा रहा है। बीच-बीच में मरम्मत का काम चलता रहता है। पुलिस सुरक्षा नहीं मिलने से भारी वाहन गुजरते हैं। इससे रास्ता क्षतिग्रस्त हो जाता है। फिर भी सुधार के प्रयास जारी हैं।
- रथिन सिन्हा, एक्सईएन पीडब्ल्यूडी
शासन को कई माह पहले कोलाघाट पुल का प्रस्ताव भेजा गया है। संभावना है कि आचार संहिता हटने के बाद शासनादेश आने के बाद पुल का निर्माण शुरू हो जाएगा।
- बिजेंद्र मौर्या, डीपीएम, सेतु निगम
पैंटून पुल से पहले लगे हाइट गेज में फंसी सब्जी भरी पिकअप। संवाद
पैंटून पुल से पहले लगे हाइट गेज में फंसी सब्जी भरी पिकअप। संवाद
पैंटून पुल से पहले लगे हाइट गेज में फंसी सब्जी भरी पिकअप। संवाद