खुटार (शाहजहांपुर)। फर्जी प्रमाणपत्रों के जरिये सेना में भर्ती कराने वाले एक और गैंग पकड़ा गया है। पुलिस ने गैंग का खुलासा कर चार सदस्यों को गिरफ्तार कर बुधवार को जेल भेज दिया। पकड़े जाने वालों में खुटार का एक जनसेवा केंद्र संचालक भी शामिल है। पुलिस ने मामले में कुल नौ के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज की है। इससे पहले फर्जी प्रमाणपत्रों पर सेना में लोगों को भर्ती कराने वाला गैंग बंडा में पकड़ा गया था।
खुटार एसओ जयशंकर सिंह ने बुधवार को प्रेस कांफ्रेंस के दौरान बताया कि लखीमपुर खीरी के कस्बा मितौली निवासी शहबाज उर्फ सोनू, वहीं के गांव कचियानी का मुकेश सिंह उर्फ गोलू, मैगलगंज थाने के गांव फतेहपुर निवासी अनिरुद्ध मिश्रा सेना में भर्ती दो लोगों के प्रमाणपत्रों का सत्यापन कराने आए थे। प्रमाणपत्र फर्जी होने का संदेह होने पर तीनों को हिरासत में लेकर पूछताछ की गई। पूछताछ के बाद खुटार निवासी जनसेवा केंद्र के संचालक आफताब खां उर्फ भूरे को हिरासत में लिया गया। उसके जनसेवा केंद्र से एक लैपटॉप, फोटो स्टेट मशीन और स्कैनर, स्टांप, फर्जी घोषणा पत्र बरामद हुए। पूछताछ में पता चला कि गिरोह में दो अन्य सदस्य बुलंदशहर निवासी पवन और आदेश भी शामिल हैं।
एसओ ने बताया कि पूछताछ में पता चला कि बुलंदशहर के उपेंद्र कुमार पुत्र तेजवीर, अमन कुमार पुत्र गुरपाल सिंह, मुकेश सिंह और शाहबाज वर्ष 2019 में सेना में भर्ती होने के लिए फतेहगढ़ गए थे। वहीं उनकी मुलाकात हुई, जो दोस्ती में बदल गई। इसके बाद उपेंद्र व अमन ने शाहजहांपुर से फर्जी निवास प्रमाणपत्र बनवाने के लिए मुकेश और शहबाज से संपर्क किया। शहबाज और मुकेश ने खुटार के जनसेवा केंद्र संचालक आफताब खां उर्फ भूरे से फर्जी निवास प्रमाणपत्र बनवाने की बात की। इसके बदले दोनों ने आफताब को 15 हजार रुपये दिए थे। आफताब ने रुपयों के लालच में फर्जी आधार कार्ड और उपेंद्र, अमन के बिना हस्ताक्षर के घोषणापत्र लेकर जनसेवा केंद्र से निवास प्रमाणपत्र के लिए ऑनलाइन आवेदन कराया था। दोनों को फर्जी निवास प्रमाणपत्र भी जारी हो गया। खुटार से बने फर्जी प्रमाणपत्रों के आधार पर उपेंद्र और अमन सेना में भर्ती हो गए, जो अब ट्रेनिंग कर रहे हैं। इसके बाद निवास प्रमाण पत्र सत्यापन के लिए उपेंद्र और अमन ने शहबाज और मुकेश से संपर्क किया। दोनों ने कहा कि आदेश और पवन नाम के व्यक्ति का फोन जाने के बाद वे लोग फर्जी प्रमाणपत्रों का खुटार थाने से सत्यापन करा दें। इसके लिए डेढ़ लाख रुपये में सौदा तय हुआ था। इसके लिए शहबाज, मुकेश को 30 हजार रुपये एडवांस में भी मिल गए थे। शहबाज और मुकेश ने अनिरुद्ध मिश्रा उर्फ नेताजी नाम के दलाल को अपने गिरोह में शामिल कर लिया और सत्यापन कराने के एवज में उसे 50 हजार रुपये देने का लालच दिया था।
शहबाज, मुकेश और अनिरुद्ध फर्जी निवास प्रमाणपत्र का सत्यापन कराने के लिए खुटार कस्बे के दरोगा रामानंद मिश्रा से मिले। तीनों ने दरोगा को सत्यापन के लिए रुपये देने का प्रयास किया। शक होने पर तीनों को पकड़ लिया गया। पूछताछ में आरोपियों ने बताया कि वे लोग सेना में चयनित अमन और उपेंद्र के फर्जी निवास प्रमाणपत्र के सत्यापन के लिए आए थे। जनसेवा केंद्र से मिले अमन और उपेंद्र के आधार कार्ड और आरोपियों से मिले आधार कार्डों के नंबर भी अलग-अलग हैं। खुटार थाने में नौ लोगों के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज कर ली गई है। उपेंद्र, अमन, पवन और आदेश फरार हैं। शहबाज, आफताब, मुकेश और अनिरुद्ध को कोर्ट से जेल भेज दिया गया है।
सेना भर्ती के लिए फर्जी कागजात तैयार करने और सत्यापन कराने का प्रयास करने के मामले में जनसेवा केंद्र संचालक सहित चार को गिरफ्तार कर जेल भेजा गया है। जांच के बाद आगे की कार्रवाई की जाएगी।
- निपुण अग्रवाल, एएसपी ग्रामीण शाहजहांपुर
दिव्यांग आफताब खां पर दर्ज हो चुकी है राष्ट्रद्रोह की रिपोर्ट
पुवायां (शाहजहांपुर)। जनसेवा केंद्र संचालक आफताब खां दिव्यांग है, लेकिन वह बेहद शातिर है। कई मामलों में उसका नाम सामने आता रहा है, लेकिन दिव्यांगता के कारण वह बचता रहा। फरवरी 2019 में उसके खिलाफ राष्ट्रद्रोह की धाराओं में भी रिपोर्ट दर्ज हुई थी।
लगभग पांच वर्ष पूर्व आफताब खां काफी दिनों तक लालबत्ती लगी गाड़ी में घूमता रहा था। खुटार पुलिस ने आफताब के लालबत्ती में घूमने की जांच करने की जरूरत नहीं समझी थी। कार्रवाई भी नहीं की गई थी। बाद में आफताब लालबत्ती वाली गाड़ी में लखीमपुर में पकड़ा गया था, लेकिन दिव्यांगता के कारण पुलिस की रहमदिली से बच गया था। इसके बाद वह जनसेवा केंद्र का संचालन करने लगा। आफताब का जनसेवा केंद्र क्षेत्र में मशहूर था। उसका दावा था कि जो काम किसी जनसेवा केंद्र पर न हो रहा हो, उसे वह करा देगा। इसके लिए वह अपने ऊंचे संबंधों की बात भी कहता रहता था। फरवरी 2019 में मूलरूप से पूरनपुर और वर्तमान में खुटार के गांव नगरा निवासी बलीहसन ने देश विरोधी पोस्ट की थी। खुटार निवासी संतोष वाजपेयी ने 21 फरवरी 2019 को रिपोर्ट दर्ज कराई थी कि देश विरोधी पोस्ट के लिए बलीहसन को गांव नगरा के इमरान और खुटार निवासी आफताब खां ने शह दी थी। आफताब सहित तीन लोगों पर राष्ट्रद्रोह, आईटी एक्ट आदि धाराओं में रिपोर्ट दर्ज की गई थी। इसके बाद आरोपी जेल गए थे और जमानत पर बाहर हैं।
तहसील से कैसे जारी हो गया फर्जी निवास प्रमाणपत्र
पुवायां। फर्जी निवास प्रमाणपत्र आदि बनाने के मामले में पुलिस को अब लेखपाल की तलाश है। पुलिस को शक है कि जनसेवा केंद्र संचालक आफताब खां के तहसीलकर्मियों से संबंध हैं, जिस कारण उसके यहां से फर्जी पते पर ऑनलाइन किए गए प्रमाणपत्रों को जारी कर दिया जाता था। पता लगाया जा रहा है कि निवास प्रमाणपत्र पर किस लेखपाल ने रिपोर्ट लगाई है। दर्ज की गई रिपोर्ट में एक तहसीलकर्मी का नाम (अज्ञात) शामिल किया गया है।
सरोजनीगर और इंद्रानगर के पते पर सेना में भर्ती हुए हैं उपेंद्र और अमन
पुवायां। लखीमपुर निवासी शहबाज दरोगा रामानंद मिश्रा से उदय बनकर मिला था। निवास प्रमाणपत्र सत्यापित कराने के लिए खुश करने का वादा भी किया था। शहबाज फर्जी नाम से दरोगा से मिला और खुद को अमन का चचेरा भाई बताया, जबकि मुकेश ने खुद को उपेंद्र का चचेरा भाई बताया था। सेना में भर्ती होकर ट्रेनिंग कर रहे अमन ने अपना पता खुटार का मोहल्ला सरोजनीनगर और उपेंद्र ने अपना पता मोहल्ला इंदिरानगर लिखा रखा था। पुलिस को आरोपियों के पास से अमन की हाईस्कूल की मार्कशीट डीएवी कॉलेज बुलंदशहर और उपेंद्र की गर्वमेंट स्कूल राजगढ़ी बुलंदशहर की मिली है। पुलिस जांच कर रही है कि दोनों की मार्कशीट भी फर्जी तो नहीं है। सेना में फर्जी निवास प्रमाणपत्र पर भर्ती उपेंद्र और अमन बेहद शातिर हैं। दोनों ने मुकेश, अनिरुद्ध और शहबाज से फर्जी प्रमाणपत्र बनवा लिए और सत्यापन का काम भी उनको सौंप दिया, लेकिन अपना असली पता किसी को नहीं बताया है। निवास प्रमाणपत्र ऑनलाइन कराने में दोनों ने खुद को छात्र बताया है।