आज के इस कंप्यूटरीकृत युग में तमाम लोग ऐसे हैं, जो बचपन में पढ़ाई न कर पाने की वजह से अशिक्षित हैं। अपना नाम न लिख पाने और पढ़ाई न कर पाने वाले ऐसे लोगों में साक्षरता की अलख जगाने का काम लोक शिक्षा केंद्रों के माध्यम से किया जा रहा है। इन केंद्रों पर 15 वर्ष से अधिक उम्र के लोगों को पढ़ाया जाता है, जिससे कि वे लोग हिंदी लिखने और पढने के साथ ही जरूरी जोड़, घटाना और गुणा-भाग करना सीख सकें। इससे उन लोगों को समाज की मुख्य धारा के साथ चलने में आसानी होगी।
जिले में शैक्षिक सत्र 2015-16 में जिले के एक लाख निरक्षरों को साक्षर करने का लक्ष्य तय किया गया है। इसके लिए पंद्रह बसंत पार कर चुके लोगों को साक्षर करने के लिए जिले की 922 ग्राम पंचायतों में लोक शिक्षा केंद्रों को संचालन किया जा रहा है। इन केंद्रों पर प्रेरकों की नियुक्ति की गई है, जो निरक्षरों को प्रेरित करके लोक शिक्षा केंद्रों पर लाते हैं।
इन केंद्रों पर निरक्षरों के अंदर शिक्षा की अलख जगाते हुए साक्षर करने का प्रयास किया जा रहा है। केंद्रों पर नियुक्ति प्रेरक शिक्षण कार्य करने के बाद जोड़-घटाना, गुणा-भाग, हिंदी पढ़ना और लिखना सिखाते हैं। इससे उन लोगों को अंगूठा लगाने की जगह हस्ताक्षर करना आ जाता है। साथ ही अपने अन्य जरूरी कार्यों को खुद करना सीख जाते हैं, जिनके लिए उन्हें दूसरों पर आश्रित रहना पड़ता था।
जेल में 110 बंदियों को किया जा रहा साक्षर
जिला कारागार के जेलर प्रदीप कुमार कश्यप ने बताया कि जेल में साक्षरता कार्यक्रमों को निरंतर संचालित किया जा रहा है, ताकि जेल से छूटने के बाद बंदियों को लिखा-पढ़ी करने में परेशानी का सामना न करना पड़े। कहा कि जेल में करीब 110 बंदियों को साक्षर किया जा रहा है। कहा कि पढ़ाने के बाद इन लोगों की परीक्षा भी कराई जाती है।
Òजिले के 922 लोक शिक्षा केंद्रों पर करीब एक लाख लोगों को साक्षर करने का लक्ष्य तय किया गया है। इसी आधार पर योजना बनाकर कार्य शुरू कर दिया गया है। केंद्रों पर आने वाले निरक्षरों को साक्षर कराया जा रहा है।Ó
- एसपी गुप्ता, कार्यक्रम अधिकारी लोक शिक्षा