पुरानी बसों में वाइपर भी अधूरे
नई बसों में व्यवस्थाएं ठीक हैं, लेकिन अधिकतर पुरानी बसों में एक तरफ ही वाइपर है। कोहरे में चालक के सामने वाले शीशे की दूसरी तरफ सफाई की व्यवस्था नहीं होने से दृश्यता प्रभावित होने का खतरा रहता है। वहीं, रोडवेज वर्कशॉप में बसों के शीशे दुरुस्त कराने की व्यवस्था भी सीमित है। विभाग के पास पांच से सात साइड शीशे ही उपलब्ध हैं। मुख्य शीशा टूटने पर बस को हरदोई भेजना पड़ता है।
एआरएम अरुण कुमार ने बताया कि अधिकतर नई बसों में फॉग लाइटें लगी हैं। पुरानी बसों में भी जल्द फॉग लाइटें लगवाई जाएंगी। कुछ बसों के शीशे टूटे होने की जानकारी मिली है। उन्हें दुरुस्त कराने के साथ शीशों के हुक और रबर भी लगवाए जाएंगे।