ओमप्रकाश ने पत्र में बताया कि अधिकारियों की लापरवाही के कारण उसका बैंक का खाता होल्ड कर दिया गया है। खाते का रुपया तक नहीं निकाल पा रहा हूं। कागजों में मृत ओमप्रकाश जिंदा होने का प्रमाण दे रहे हैं। वह अधिकारियों के दफ्तरों में पिछले एक साल से जा रहे हैं, लेकिन उनकी सुनवाई नहीं हो रही है।
ओमप्रकाश ने बताया कि अधिकारी कागजों पर ही भरोसा कर रहे हैं। वह सामने खड़े होकर जिंदा होने का सबूत दे रहे हैं, लेकिन कोई मानने को तैयार नहीं है। समाज कल्याण अधिकारी समेत कई अफसर उनकी सुनने के बजाय उन्हें चलता कर दे रहे हैं। जिससे वह काफी परेशान हो चुके हैं।