डीएम के निर्देश पर बृहस्पतिवार को जिले के समस्त स्कूलों में मिड-डे मील (एमडीएम) और अध्यापक उपस्थिति जांची गई। इस दौरान मुख्यालय और ब्लाक स्तरीय विभागीय अधिकारियों के अलावा प्रशासनिक अधिकारियों ने भी आवंटित विकास खंड में जाकर ‘सच का सामना’ किया।
नया शिक्षण सत्र शुरू होते ही स्कूलों में बच्चों की उपस्थिति बढ़ाने तथा शत प्रतिशत नामांकन कराने का दबाव विभागीय अधिकारियों के अलावा डीएम पर भी आ गया है। लिहाजा डीएम के निर्देश पर बृहस्पतिवार को टास्क फोर्स ने स्कूलों में क्रास चेकिंग कर न सिर्फ मिड-डे-मील की हकीकत जानी, बल्कि शिक्षक उपस्थिति भी देखी। निरीक्षण सभी परिषदीय स्कूलों में चलाया जाना था, लेकिन अधिकारियों ने कितनी सफलता हासिल की इसका पता तो तभी चलेगा, जब रिपोर्ट सामने आएगी। रिपोर्ट आने में एक-दो दिन का समय लग सकता है। इसके बाद ही पता चलेगा कि डीएम की ‘परीक्षा’ में कितने गुरुजन पास हुए और कितने फेल।
वैसे तो निरीक्षण को पूरी तरह गोपनीय रखा गया था, लेकिन सुबह निरीक्षण के लिए जैसे-जैसे अधिकारियों की गाड़ियां स्कूलों की पगडंडी पर दौड़ती दिखीं कि शिक्षकों के मोबाइल सक्रिय हो गए। निरीक्षण की सूचना से हड़कंप मच गया। अब गुरुजन रिपोर्ट आने की प्रतीक्षा कर रहे हैं। बीएसए राजेश वर्मा ने शिक्षकों को निर्देश दिए हैं कि वह शिक्षा की गुणवत्ता के लिए स्कूलों में नियमित और समय से पहुंचें।