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नरई की आग में किसान के जिंदा जलने से अफसर अलर्ट

Wed, 19 Apr 2017 12:21 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो, शाहजहांपुर
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पड़ोस के खेतों में खड़ी नरई की आग से अपनी फसल बचाने के प्रयास में वृद्ध किसान जयराखन के जिंदा जलने की घटना से प्रशासन अलर्ट हो गया है। बंडा क्षेत्र के गांव पड़रिया दलेलपुर में बुजुर्ग जयराखन की मौत के बाद सभी एसडीएम और थाना प्रभारियों को इस तरह की घटना का दोहराव रोकने को क्षेत्र में निगरानी बढ़ाने के निर्देश दिए गए हैं। इस बीच, प्रशासन ने मृतक किसान के आश्रितों को चार लाख रुपये की आर्थिक सहायता देने का निर्णय लिया है। 
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बता दें कि पड़रिया दलेलपुर के पूर्व प्रधान संत कुमार के वृद्ध पिता जयराखन सोमवार को सुबह गेहूं की फसल देखने अपने खेत पर गए थे। इसी दौरान पास के खेतों में फसल कटने के बाद खड़ी नरई में किसी ने आग लगा दी। उस वक्त आसपास के खेतों में अन्य कोई किसान नहीं था। तेज हवा से आग की लपटों ने जयराखन के खेत में खड़ी फसल को अपने आगोश में ले लिया। फसल में लगी आग बुझाने के प्रयास में जयराखन भी लपटों में घिर गए और वहीं उनकी मौत हो गई। घरवालों की सूचना पर पहुंची राजस्व विभाग की टीम ने मौका मुआयना किया और पुलिस ने शव कब्जे में ले लिया। शव का पोस्टमार्टम हुआ, लेकिन अधिकारियों को पोस्टमार्टम रिपोर्ट नहीं मिलने के कारण मंगलवार शाम तक मृतक के आश्रितों को आर्थिक सहायता का भुगतान नहीं हो सका। नायब तहसीलदार ज्ञानेंद्र कुमार ने मृतक आश्रित को चार लाख रुपये की सहायता स्वीकृत होने की पुष्टि करते हुए कहा कि इसके लिए कागजी कार्यवाही पूरी हो चुकी है। 
एडीएम प्रशासन जितेंद्र कुमार शर्मा के अनुसार सभी एसडीएम और थाना प्रभारियों को इस घटना का संज्ञान लेते हुए स्पष्ट निर्देश दिए गए हैं कि अपने क्षेत्रों में फसल कटाई के बाद नरई के निस्तारण पर कड़ी नजर रखें और उसे किसी भी दशा में जलाने नहीं दें। यह भी कहा गया है कि फसल अवशेष जलाने वालों से लेखपाल रिपोर्ट के आधार पर जुर्माना वसूली प्रक्रिया शुरू करें। बता दें कि दो एकड़ से कम जोत वालोें से 2500 रुपये, पांच एकड़ तक जोत वालों से 5000 रुपये और इससे अधिक बड़े किसानों से 15000 रुपये प्रति घटना जुर्माना लिया जाना है। 
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52.4 लाख क्विंटल नरई बचने का अनुमान
कृषि विभाग के आंकड़ोें के मुताबिक 40 क्विंटल प्रति हेक्टेयर मानक उत्पादकता के आधार पर एक हेक्टेयर में 4.5 ट्राली अर्थात लगभग 20 क्विंटल भूसा तैयार होता है। इस हिसाब से जिले के 2.62 लाख हेक्टेयर गेहूं रकबा में 52.4 लाख क्विंटल फसल अवशेष होने का अनुमान है। हालांकि, कम जोेत वाले किसान करीब 40 फीसदी फसल कटाई मैनुअल करते हैं, जिसमें नरई पौधों के साथ कट जाती है। 
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कृषि यंत्रों में किसानों की नहीं दिलचस्पी
नरई से भूसा बनाने के लिए प्रशासन ने कंबाइन मशीनों के साथ रीपर बाइंडर लगाना अनिवार्य कर दिया है। इसके बावजूद किसान सिर्फ गेहूं में दिलचस्पी ले रहे हैं। इसलिए कंबाइन वाले भी गेहूं की गहाई कर नरई खेत में छोड़ रहे हैं। एक अन्य कृषि यंत्र रोटावेटर की मदद से खेत में जुताई कर पानी भरने और प्रति एकड़ दस किलो यूरिया डालकर फसल अवशेष से जैविक खाद बनाई जा सकती है। जिला कृषि अधिकारी डीएस चौधरी के अनुसार यह दोेनों कृषि यंत्र 50 प्रतिशत अनुदान पर उपलब्ध हैं, लेकिन किसान इन यंत्रों पर निवेश करने में ज्यादा दिलचस्पी नहीं ले रहे।
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