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अब परीक्षण को बरेली नहीं भेजने पड़ेंगे मिट्टी के नमूने

Sat, 26 Aug 2017 12:00 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो, शाहजहांपुर
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खेत की मिट्टी फसल के अनुकूल बनाने और उससे अधिकतम कृषि उत्पादन लेने के लिए कृषि वैज्ञानिक मिट्टी के नियमित परीक्षण पर जोर देते हैं। जिले के किसान अभी तक कार्बन, नाइट्रोजन, पोटाश आदि तत्वों की जांच नियत शुल्क देकर कृषि विज्ञान केंद्र, गन्ना शोध परिषद अथवा कृषि विभाग की प्रयोगशालाओं में करा लेते थे, लेकिन सूक्ष्म पोषक तत्वों समेत कॉपर, बोेरान, जिंक आदि की जांच के लिए मिट्टी के नमूने बरेली ले जाने पड़ते थे। शासन से प्राप्त मृदा परीक्षण मशीन जिला मुख्यालय पर स्थापित होने से अब किसानों को यह सुविधा स्थानीय स्तर पर ही मिल सकेगी। 
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रोजाना दो सौ नमूनों की हो सकेगी जांच
इस वर्ष अभी तक 1.10 लाख मृदा नमूनों के सापेक्ष बमुश्किल 18 हजार नमूनों की जांच हो सकी। गत वर्ष के नमूनों की जांच को इसमें सम्मिलित कर लिया जाए तो अभी तक सिर्फ 47 हजार मृदा स्वास्थ्य कार्ड जारी हो सके हैं। लोधीपुर स्थित मृदा परीक्षण प्रयोगशाला में स्थापित 22 लाख रुपये की नई मशीन से रोजाना लगभग दो सौ नमूनों में सभी तत्वों की जांच की जा सकेगी। खास यह है कि मृदा स्वास्थ्य कार्ड रखने वाले किसानों के नमूनों की जांच मुफ्त की जाएगी, जबकि अन्य किसानों को मामूली शुल्क चुकाना होगा।    

जिले में चल रही हैं कई मृदा प्रयोगशालाएं
मुख्यालय पर कृषि विभाग की प्रयोगशाला लोधीपुर में स्थापित है जबकि पुवायां, जलालाबाद और तिलहर तहसील में भी यह प्रयोगशालाएं मिट्टी के नमूनों में सिर्फ मेजर तत्वों की जांच कर रही हैं। इसके अतिरिक्त गन्ना शोध परिषद, कृषि विज्ञान केंद्र और तिलहर चीनी मिल में भी मृदा परीक्षण यूनिट कार्यरत हैं।  
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मृदा स्वास्थ्य कार्ड के कई मानक नियत 
मृदा स्वास्थ्य कार्ड केवल उन्हीं किसानों को जारी करने का प्रावधान है जो मिट्टी की जांच को नियत 12 मानक पूरे करते हों। इसमें एनपीके, पीएच मान, इलेक्ट्रिकल कंडक्टिविटी, मैग्नीशियम, सल्फर, जिंक, फेरस, पॉलीबिडेनिम और सूक्ष्म पोषक तत्वों की जांच शामिल है। अभी तक माइक्रो न्यूट्रिएंट्स की जांच नहीं हो पाने की वजह से किसानों को मृदा स्वास्थ्य कार्ड भी जारी नहीं हो पाते थे, लेकिन नई मशीन आने से किसानों की यह बाधा भी दूर होगी। 

जैविक खादों और पोटाश से किसान उदासीन 
कृषि विज्ञान केंद्र के मृदा परीक्षण प्रयोगशाला प्रभारी डॉ. पुष्पराज सिंह का कहना है कि फसलों के लिए टॉनिक का काम करने वाले पोटाश तत्व और अन्य जैविक खादों का किसान बेहद कम इस्तेमाल कर रहे हैं। इसीलिए अधिकांश नमूनों का विश्लेषण करने पर भारी तत्वों में पोटाश समेत नाइट्रोजन की कमी पाई जा रही है। उन्होंने बताया कि माइक्रो न्यूट्रिएंट के कल्चर टेस्ट में बोरान कम पाया जा रहा है और इसकी वजह से खट्टापन देने वाली सिट्रिस प्रजातियों की फसलों का उत्पादन प्रभावित होता है। 

मानसून सीजन में पानी से खेतों में नमी बढ़ने पर मिट्टी में विवभिन्न तत्वों का अनुपात गड़बड़ा जाता है। इसीलिए आजकल मृदा नमूूने नहीं लिए जा रहे हैं। अक्तूबर-नवंबर में मिट्टी के नमूने मिलने शुरू हो जाएंगे। मृदा परीक्षण मशीन चालू हालत में रखने के लिए प्रयोगशाला को पॉवर बैकअप जारी रखने की व्यवस्था की गई है।  
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- डॉ. प्रभाकर सिंह, कृषि उप निदेशक
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