यूपी बोर्ड की कापियाें का मूल्यांकन होने के बाद अब गुरुजनों का मूल्यांकन किया जा रहा है। छात्र-छात्राओं को फेल-पास करने वाले गुरुजनों की योग्यता का आंकलन उनके ही साथी कर रहे हैं। फर्क सिर्फ इतना है कि परीक्षार्थियों की गलती उन्हें अनुत्तीर्ण कर सकती है, लेकिन गुरु जी की गलती पर यदि मूल्यांकनकर्ता (अंकेक्षणकर्ता) ने उनका सीसी-25 फार्म भर दिया तो गुरु जी के मूल्यांकन पारिश्रमिक का बड़ा हिस्सा काट लिया जाएगा। यह सजा गलतियों के प्रतिशत पर निर्धारित की जाती है। इसमें मूल्यांकन कार्य से डिबार होने का भी खतरा बना रहता है।
ऐसी ही बड़ी परीक्षा से इन दिनों गुरुजन गुजर रहे हैं। चूंकि मूल्यांकन हो चुका है और अब मूल्यांकित कापियों की फिर से जांच हो रही है, जिसे अंकेक्षण कहा जाता है। इस प्रक्रिया में यह देखा जाता है कि कापी सही ढंग से जांची गई है अथवा नहीं या उसके प्राप्तांक का जोड़ सही चढ़ा है अथवा नहीं। यह काम प्रत्येक विषय में 15 प्रतिशत किया जाता है। अंकेक्षण में पाई गई 0.5 फीसदी गलती पर पारिश्रमिक का 25 प्रतिशत, एक प्रतिशत गलती पर 50 प्रतिशत तथा दो प्रतिशत गलती पर 85 फीसदी पारिश्रमिक कटौती और तीन वर्ष तक डिबार होने का इंतजाम किया जाता है।
अभी तक के अंकेक्षण में हाई स्कूल स्तर के किसी परीक्षक का सीसी-25 फार्म नहीं भरा गया है, लेकिन इंटरमीडिएट में एक गुरु जी बुरी तरह फंस चुके हैं। उन पर बोर्ड परीक्षा के कार्यों से डिबार होने की तलवार जरूर घूम रही है।