इंटीग्रल यूनिवर्सिटी की स्थानीय शाखा में विमुद्रीकरण (नोट बंदी) पर परिचर्चा का आयोजन किया गया। मुख्य वक्ता डीए अल्वी ने कहा कि केंद्र सरकार का नोट बंदी का निर्णय सराहनीय है, लेकिन इसका क्रियान्वयन सही नहीं होने से आम जनता को परेशान होना पड़ रहा है। विमुद्रीकरण से देश की अर्थव्यवस्था सुदृढ़ होगी और कालाबाजारी, आतंकवाद फैलाने वाले कमजोर पड़ेंगे, लेकिन उसके लिए केंद्र का जनता का भी ध्यान रखना चाहिए। संस्था प्रधान मोहम्मद वसी बेग ने एक कहानी का उदाहरण देते हुए विमुद्रीकरण को सही बताते हुए आम जनता से सहयोग की अपील की। उन्होंने कहा कि पांच सौ और एक हजार के नोट बंद होने से अर्थ व्यवस्था काफी प्रभावित होगी, क्योंकि बड़े नोट करीब 86 प्रतिशत चलन में थे। अब स्थिति सुधरने में थोड़ा समय जरूर लगेगा। अदनान खां ने कहा कि यह देशहित में लिया गया एक कठोर कदम है, इसका मुख्य उद्देश्य काला धन पर लगाम लगाना और डिजिटल व्यवस्था लागू करना है। इस मौके पर शहवाज अहमद, तौहीद कमर आदि ने भी विमुद्रीकरण को उचित बताया। परिचर्चा में मो. रमजान, आफताब अहमद, गुफरान, यासिर, मुनाजिर खां, प्रदीप कुमार, मोनिस खां, शिराज खां, फिरदौस खां, फरीद आदि मौजूद रहे।