प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की नमामि गंगे परियोजना को परवान चढ़ाने के लिए प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड ने भी कमर कस ली है। राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड ने मिलों, खासतौर से पल्प एंड पेपर, से निकलने वाले दूषित पानी को शुद्घ किए बिना किसी भी नदी में बहाने पर रोक लगा दी है। बोर्ड ने इसके लिए मिलों को केमिकल रिकवरी प्लांट (सीआरपी) लगाने के निर्देश दिए हैं। इस बाबत शाहजहांपुर की दो मिलों को नोटिस जारी किया गया है। बोर्ड ने मिल संचालकों को दो टूक कह दिया है कि अगर प्लांट नहीं लगा सकते तो मिल बंद कर दें।
राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के सदस्य, सचिव जेएस यादव ने मार्च में जारी किए नोटिस में कहा है कि केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड की 25 सितंबर को हुई बैठक में पल्प और पेपर इंडस्ट्रीज के प्रतिनिधियों ने भी भाग लिया था। इसमें पल्प और पेपर इंडस्ट्रीज से निकलने वाले दूषित पानी को शुद्घ करने के बाद ही नदियों में बहाने पर विचार-विमर्श हुआ था। इसमें तय हुआ था कि पल्प और पेपर मिलों से निकलने वाले दूषित पानी को शुद्घ करने के बाद ही नदियों में प्रवाहित किया जाएगा। इसके लिए सभी मिलों में केमिकल रिकवरी प्लांट (सीआरपी) लगाने के निर्देश दिए गए थे।
सीआरपी को लगाने के लिए शाहजहांपुर की केआर पेपर मिल और शाहजहांपुर पेपर एंड बोर्ड प्राइवेट लिमिटेड को नोटिस जारी किया गया है। ऐसा न करने की स्थिति में मिल को बंद करने के निर्देश दिए गए हैं। इसका अनुपालन 31 मार्च तक करने की बंदिश भी है। इससे मिल संचालकों के साथ ही उनमें काम कर रहे कर्मचारियों में हड़कंप मचा हुआ है।
प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के इस आदेश से शाहजहांपुर पेपर एंड बोर्ड प्राइवेट लिमिटेड तो बंद होने के कगार पर है। ऐसा इसलिए है क्योंकि सीआरपी लगाने के लिए करीब 15 करोड़ रुपये खर्च करने पडे़ंगे, जबकि इतनी राशि का तो पूरी मिल का ही बजट नहीं है। इस नोटिस ने मिल संचालकों की परेशानी बढ़ा दी है। उनका कहना है कि सीआरपी लगाना उनके बूते से बाहर है। लिहाजा उन्हें मिल ही बंद करनी पड़ेगी। ऐसे में मिल में काम करने वाले सैकड़ों लोगों की रोजी-रोटी पर संकट के बादल मंडराने लगे हैं।
‘राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड से हमारी मिल को भी केंद्र सरकार द्वारा जारी गाइड लाइंस आईं थीं। हमारी मिल में पहले से ही केमिकल रिकवरी प्लांट लगा हुआ है। लिहाजा इस नोटिस से मिल प्रबंधन पर कोई फर्क नहीं पड़ेगा।’
-जेपी गुप्ता, जनरल मैनेजर, केआर पल्प एंड पेपर मिल
‘केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड का आदेश है। यह प्रदेश की सभी पेपर्स मिलों को भेजा गया है। मिल संचालक या तो केमिकल का प्रयोग न करें। यदि किसी प्रकार के केमिकल प्रयोग करते हैं, तो मिल में केमिकल रिकवरी प्लांट लगाना अनिवार्य होगा।’
-हरिश्चंद्र जोशी, सहायक वैज्ञानिक अधिकारी, राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड
अब जिले में नहीं बन पाएगा गत्ता
जिले की केआर पल्प एंड पेपर मिल में क्राफ्ट पेपर, राइटिंग और प्रिंटिंग पेपर बनाया जाता है। शाहजहांपुर पेपर एंड बोर्ड प्राइवेट लिमिटेड में दफ्ती का गत्ता बनता था, जो अब मिल बंद होने पर नहीं बन पाएगा। इसकी मुख्य खपत फिरोजाबाद जिले में चूड़ियों की पैकिंग के लिए होती थी। अब ये डिब्बे किसी अन्य उत्पाद से बनाए जाएंगे।
विदेशों में जाता है जिले से पेपर
केआर पल्प एंड पेपर मिल में बनने वाले कागज की खपत न सिर्फ देश में होती है, बल्कि विदेशों में भी एक्सपोर्ट किया जाता है। इस मिल के पेपर को नेपाल के साथ ही कई अफ्रीकी देशों में भेजा जाता है।
मिलों के रसायनयुक्त पानी से ऐसे दूषित होती है गंगा
पेपर मिलों से निकलने वाले रसायन युक्त पानी को जिले में बहने वाली खन्नौत और गर्रा नदी में प्रवाहित किया जाता है। यह दोनों नदियां शाहजहांपुर की सीमा में ही एक हो जाती हैं और फिर अल्हागंज के पास रामगंगा में मिल जाती हैं। अल्हागंज से कुछ आगे निकलकर रामगंगा, गंगा में मिल जाती है। इससे जिले की मिलों से निकलने वाले रसायनयुक्त पानी से गंगा का निर्मल जल दूषित हो जाता है।