शाहजहांपुर। समर्थन मूल्य पर गेहूं की सरकारी खरीद सोमवार से शुरू होनी है, लेकिन जिले की मंडियों में रविवार को तैयारी के नाम पर सन्नाटा दिखा। सहकारी समितियों पर भी अनुमोदित क्रय केंद्रों का कांटा, बांट व बारदाना आदि कोई सामान नहीं दिखा। अभी गेहूं की आवक भी बहुत कम है। इसलिए शुरुआती एक सप्ताह तक सरकारी खरीद होने की उम्मीद कम है।
गेहूं खरीद के लिए डीएम धर्मेंद्र प्रताप सिंह ने जनपद में 197 क्रय केंद्र स्वीकृत किए हैं। जिला खाद्य एवं विपणन अधिकारी राकेश मोहन पांडेय का दावा है कि केंद्रों का चयन करने के साथ उन पर क्रय केंद्र प्रभारियों समेत अन्य कर्मचारी नियुक्त किए जा चुके हैं। केंद्र प्रभारियों को बैनर, पोस्टर, कांटा, बांट, चलना, पंखा, बारदाना आदि सामान भी मुहैया कराया जा चुका है। इसके विपरीत मंडियों में धरातल पर ऐसा कुछ नहीं दिख रहा है।
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रोजा मंडी में सामान लेकर नहीं पहुंचे केंद्र प्रभारी
रोजा। जिला मुख्यालय की इस मंडी में विभिन्न क्रय एजेंसियों के 17 क्रय केंद्र स्थापित होने हैं। रविवार को मंडी परिसर का जायजा लेने पर वहां के वह सभी टिनशेड खाली दिखे, जहां एक दिन बाद गेहूं की सरकारी खरीद शुरू होनी है। न तो कहीं किसी क्रय केंद्र का बैनर नजर आया और न ही अन्य साज-सामान। केंद्र प्रभारी और उनके सहयोगी भी वहां नहीं दिखे। हालांकि, मंडी समिति के सचिव विक्रम वाजपेयी का कहना है कि केंद्र प्रभारियों को खरीद से जुड़ा सामान गत एक मार्च से पहले ही उपलब्ध कराया जा चुका है। संवाद
जलालाबाद मंडी में तैयारी के नाम पर शून्यता
जलालाबाद। समर्थन मूल्य पर गेहूं की सरकारी खरीद को लेकर रविवार को मंडी में कोई तैयारी होती नजर नहीं आई। रविवार को अवकाश के कारण मंडी समिति कार्यालय में ताला लटका मिला। समिति के जिस टीन शेड में सेंटर शुरू होने हैं, वहां भी सन्नाटा मिला। बता दें कि क्षेत्र की विभिन्न सहकारी समितियों के 15 सेंटर स्वीकृत हुए हैं। इनमें से नौ सेंटर मंडी परिसर में और छह अन्य विभिन्न जगहों पर खोले जाने हैं। मंडी समिति में आरएफसी के चार, यूपीएसएस के चार तथा मंडी समिति का एक सेंटर, पीसीएफ का एक मनोरथपुर सहसोबारी समिति व एक मदनापुर के गांव चमरडुही स्थित सहकारी समिति में, पीसीयू का एक जलालाबाद के गांव ठिगरी सहकारी समिति तथा दूसरा मदनापुर के गांव बरुआ सहकारी समिति में, यूपीएसएस का एक खंडहर गांव के सहकारी समिति और दूसरा कलान सहकारी समिति में संचालित होना है। संवाद
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आवक में कमी से शुरुआती पखवाड़े में खरीद कम होने के आसार
-खेतों में तैयार हो रही गेहूं की फसल अभी हरी बनी हुई है। हालांकि, कृषि उत्पादन में अग्रणी पुवायां क्षेत्र में जिन किसानों ने अगैती प्रजातियों के गेहूं की बोआई की, उनकी फसल में पीलापन झलकने लगा है, लेकिन बालियों के पकने और दाना पुष्ट होने में अभी एक सप्ताह का समय लग सकता है। खास यह है कि अभी जनपद को शासन से खरीद लक्ष्य भी नहीं मिला है। बता दें गत वर्ष जिले में गेहूं खरीद का लक्ष्य 3.11 लाख मीट्रिक टन दिया गया, लेकिन लक्ष्य के सापेक्ष केवल 23 फीसदी खरीद हो सकी थी। गत वर्ष की तुलना में समर्थन मूल्य प्रति क्विंटल 150 रुपये बढ़ाकर 2425 रुपये प्रति क्विंटल घोषित किया गया है, लेकिन पिछले साल की तरह खुले बाजार में गेहूं का भाव बढ़ा तो क्रय केंद्रों पर खरीद प्रभावित होनी तय है।
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होली के अवकाश पर घरों को गए गेहूं खरीद से जुड़े अधिकारी व कर्मचारी देर रात तक वापसी करके सोमवार सुबह से अपने क्रय केंद्र व्यवस्थित कर लेंगे। उन्हें खरीद के लिए सभी आवश्यक सामान पहले ही उपलब्ध कराया जा चुका है। अभी गेहूं में नमी भी शासन से निर्धारित मानक 12 प्रतिशत से अधिक है। समर्थन मूल्य पर गेहूं की बिकवाली के लिए किसान अपनी पंजीकरण करा लें और गेहूं को भली प्रकार सुखाने के बाद ही उसे क्रय केंद्रों पर लेकर आएं।
-राकेश मोहन पांडेय, जिला खाद्य एवं विपणन अधिकारी
पुवायां क्षेत्र में गेहूं की फसल पकने में लगेगा समय
पुवायां। सरकार की ओर से गेहूं खरीद शुरू करने के लिए तैयारियां शुरू कर दी गई है लेकिन क्षेत्र में अभी गेहूं पकने में ही 15 से 20 दिन का समय लगेगा। अभी गेहूं खरीद शुरू करने के लिए इंतजार करना पड़ेगा। उधर पुवायां मंडी में भी अभी गेहूं खरीद की तैयारियों की शुरुआत नहीं हुई है। गेहूं पकाई के लिए हवाओं के रुख पर निर्भर होना पड़ेगा। अगर तेज हवाएं चलती हैं तो गेहूं जल्दी पक जाएगा। संवाद
जलालाबाद मंडी समिति में संचालित होने वाले टिनशेड में पसरा सन्नाटा। संवाद