साठा धान पर रोक लगाने और नर्सरी को नष्ट करने के मामले में शुक्रवार को किसानों ने गुटैया स्थित एक राइस मिल परिसर में पंचायत का आयोजन किया। पंचायत में पहुंचे अधिकारियों के समक्ष किसानों ने साठा धान लगाने के पक्ष में तर्क रखे। अधिकारियों ने किसानों को साठा का उत्पादन बंद करने के लिए राजी करने का भरसक प्रयास किया लेकिन किसान नहीं माने। बृहस्पतिवार को गुटैया क्षेत्र में साठा धान की नर्सरी को जुतवाकर नष्ेट कराने पहुंचे नायब तहसीलदार और पुलिस को किसानों के तीखे विरोध का सामना करना पड़ा था। इसको लेकर किसानों ने एसडीएम को ज्ञापन भी दिया था। शुक्रवार को पंचायत की जानकारी देते हुए अधिकारियों को किसानों की बात सुनने केे लिए आमंत्रित किया गया था। निर्मल सिंह की अध्यक्षता में आयोजित किसान पंचायत में उप कृषि निदेशक डॉ. प्रभाकर सिंह, जिला कृषि अधिकारी धीरेंद्र सिंह चौधरी, जिला उद्यान अधिकारी डॉ. जयराम वर्मा, एसडीएम रामशंकर पहुंचे। किसानों ने अधिकारियों से कहा कि इस वर्ष आलू की फसल में प्रति एकड़ 50 हजार रुपये का खर्च आया, जबकि बिक्री से महज 30 हजार रुपये ही मिले हैं। आलू और मटर दोनों फसलों में भारी घाटा हुआ है। साठा धान किसान के घाटे की भारपाई करता है। साठा नहीं लगने से आलू और मटर का घाटा पूरा नहीं होगा और खेत खाली रहने से किसानों को भारी नुकसान होगा। साठा नहीं लगाने देने पर आलू आदि का घाटा मुआवजे के रूप में दिया जाना चाहिए।
किसानों ने कहा कि पुवायां क्षेत्र में 25 लाख क्विंटल साठा धान का उत्पादन होता है। साठा धान नहीं होने से चावल की भी किल्लत होगी। इसके अलावा कृषि विभाग के किसी अधिकारी ने अब तक किसानों से संपर्क नहीं किया और साठा पर रोक की उन्हें जानकारी नहीं दी गई। अब जब नर्सरी तैयार हो गई है तो साठा पर रोक की बात की जा रही है। साठा धान से भूगर्भ जलस्तर गिरने की बात की जा रही है जो गलत है। जलस्तर कई वर्षों से एक ही स्थान पर है और जलस्तर केवल पुवायां में नहीं गिर रहा है, साठा पर रोक पूरे प्रदेश में लगनी चाहिए। किसानों ने कहा कि वह प्रशासन का सहयोग करने को तैयार हैं और आने वाले वर्षों में खुद ही साठा का क्षेत्रफल घटा देंगे।
पंचायत में सतवंत सिंह, अशोक सिंह, बल्देव सिंह, अमरजीत सिंह, जसविंदर सिंह, सुरेंद्र सिंह, बलजीत सिंह, पर्वत सिंह, राकेश यादव, गुरविंदर सिंह, तारा सिंह, माखन सिंह, बलविंदर सिंह, प्रमोद कुमार, सुरजीत सिंह, जागीर सिंह, दर्शन सिंह, निशान सिंह, कोतवाली प्रभारी अशोक पाल सहित तमाम किसान मौजूद रहे।
भाकियू में शामिल हैं नकली किसान
पुवायां। किसानों ने पंचायत में अधिकारियों को बताया कि भाकियू साठा धान पर प्रतिबंध की मांग कर रही है, लेकिन संगठन में नकली किसान शामिल हैं, जिन्हें वास्तविक किसानों की समस्याओं से कोई लेनादेना नहीं है। संगठन में असली किसान होते तो किसान हित का मुद्दा उठाते, किसानों का अहित करने वाला मुद्दा नहीं उठाया जाता।
कथित नेता के फोन से भड़के किसान
पंचायत के दौरान ही खुद को किसान नेता बताने वाले एक व्यक्ति ने एसडीएम को फोन किया। आवाज कम आने पर एसडीएम ने फोन का लाउडस्पीकर ऑन किया तो किसान नेता ने एसडीएम से कहा कि साठा धान किसी भी कीमत पर बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। अगर किसान न मानें तो प्रशासन उनसे सख्ती से निपटे। यह सुनकर पंचायत में आए किसान भड़क गए। वे फोन करने वाले पर रिपोर्ट दर्ज कराने की मांग करने लगे। एसडीएम ने किसी तरह किसानों को समझाकर शांत किया।
शासन स्तर तक पहुंचा साठा धान का मामला
साठा धान से होने वाले नुकसान और इस पर रोक लगाने का मामला अब शासन स्तर तक पहुंच चुका है। किसान साठा धान पर रोक लगाने से भारी घाटा होने की बात कह रहे हैं। अब एक टीम पूरे मामले की जांच करेगी।
साठा धान पर रोक का मामले को लेकर चल रही उठापटक को जिला प्रशासन ने शासन के संज्ञान में लाते हुए रिपोर्ट भेजी है। इस पर प्रमुख सचिव ने एक टीम को गठन कर दिया हैे। टीम 27 फरवरी को जिले में आकर पूरे मामले की जांच कर अपनी रिपोर्ट प्रमुख सचिव को सौंपेगी। इसके आधार पर आगे की कार्रवाई होगी। टीम जिले के अधिकारियों से वार्ता करेगी और किसानों से भी मिलेगी। बताते चलें कि तमाम लोग साठा धान पर रोक लगाने की मांग कर रहे हैं, तो किसान साठा धान लगाने के पक्ष में तर्क दे रहे हैं। उप कृषि निदेशक डॉ. प्रभाकर सिंह ने बताया कि प्रदेश से आने वाली टीम से पांच किसानों के प्रतिनिधिमंडल को मिलवाया जाएगा। इससे पहले किसानों की बात को जिलाधिकारी के समक्ष रखा जाएगा। डीएम को क्षेत्र के हालात आदि के बारे में भी बताया जाएगा। उच्च अधिकारियों के निर्देशानुसार आगे की कार्रवाई की जाएगी।