शाहजहांपुर। शारदीय नवरात्र व्रत महोत्सव शनिवार से आरंभ हो रहा है। ज्योतिषियों और पंडितों के अनुसार सूर्योदय से लेकर दोपहर 12.24 बजे तक शुभ मुहूर्त में कलश स्थापना कर देवी पूजन आरंभ होगा। इस बीच, महानगर के प्रमुख देवी मंदिरों से लेकर बाजारों तक त्योहार की धूम शुक्रवार से दिखने लगी है। ऐसे सभी मंदिरों को वहां के पुजारी और सेवक व्यवस्थित कराने में जुट गए हैं, जहां देवी के विभिन्न स्वरूपों की प्रतिमाएं अथवा उनके पवित्र चिन्ह प्राण प्रतिष्ठित हैं। शुक्रवार को त्योहार की खरीददारी को बाजारों मेें किराना की दुकानों और सब्जी मंडियों में लोग खूब उमड़े। उन्होंने पूजन और व्रत आहार की सामग्री के साथ घरों में स्थापित करने के लिए मिट्टी के कलश भी खरीदे।
इन सभी मंदिरों में आज से होगा विशेष पूजन
-बता दें कि चौक के प्राचीन फूलमती देवी मंदिर में कोई देवी प्रतिमा नहीं है, बल्कि वहां करीब दो सौ साल पहले कन्नौज से एक भक्त द्वारा लाई गई देवी मंदिर की शिला प्राण प्रतिष्ठित है। इस मंदिर की इतनी मान्यता है कि लोग दूर-दूर से मनौतियां मांगने आते हैं और तमाम परिवार वहीं पर मांगलिक अनुष्ठान भी करते हैं। प्रत्येक अमावस्या को वहां श्रद्धालुओं का मेला लगता है। नवरात्र के दिनों में देवी भक्तों की अपार भीड़ के कारण मंदिर परिसर से चौक-चारखंभा रोड तक यातायात सुचारु बनाए रखने को पुलिस ड्यूटी देती है। इसी तरह बिसरात के काली मंदिर, मंडी के दुर्गा मंदिर, बक्सरिया के दुर्गा रतन मंदिर, टाउन हाल स्थित संकट मोचन मंदिर, बाबा विश्वनाथ मंदिर और फैक्ट्री इस्टेट के मंदिर में भी देवी पूजन को सुबह से शाम तक भक्तों का तांता लगा रहता है।
खूब बिके कलश, चुनरी और पूजन सामग्री
-शनिवार को सुबह उन सभी घरों में देवी का आवाहन कर कलश स्थापना कर विशेष पूजन अनुष्ठान होंगे, जहां परिवार के सदस्य नौ दिन तक व्रत रखकर देवी की आराधना करेंगे। इसके लिए तमाम लोगों ने शुक्रवार को सुबह से ही बाजारों मेें जाकर कलश, चुनरी, पूजन सामग्री आदि खरीददारी शुरू कर दी। ग्रामीण क्षेत्र से मिट्टी के कलश बनाकर लाए लोगों ने चौक से लेकर बहादुरगंज तक कई जगह फुटपाथों पर ही कलश और उन्हें ढकने के लिए मिट्टी से निर्मित सरवा (बड़े आकार के दीपक) सजा लिए। कई कुम्हार कलश को रंग रोगन के जरिए आकर्षक बनाकर बाजारों में लाए। लोगों ने अपनी क्रय शक्ति के अनुसार दस रुपये से लेकर 50 रुपये मूल्य तक के कलश और अन्य सामग्री खरीदी।
इस तरह महामाई का आवाहन कर करें पूजन
-पंडितों और पुजारियों के अनुसार शुभ मुहूर्त में स्नान कर श्रद्घालु उस स्थान को गंगाजल छिड़क कर और गाय के गोबर से लीप कर पवित्र करें, जहां कलश स्थापित किया जाना है। कलश और उसे ढकने के पात्र को भी गंगा जल छिड़क कर पवित्र करें। जहां कलश रखा जाना है, वहां प्रभु नाम का स्मरण कर जौ के दानों की परत बिछाएं। कलश पर रोली से स्वास्तिक का चिन्ह बनाकर उसमें जल भरें और उसे जौ की परत पर रखें। कलश के अग्र भाग अर्थात उसके मुंह पर चारों ओर आम के पत्ते गोलाई से सजाकर उसे सरवा अथवा सकोरे से ढकें। तत्पश्चात लाल रंग के कपड़े में नारियल लपेट कर उसे कलश पर रखें। इसका ध्यान रहे कि नारियल का अग्र भाग पूजन कर श्रद्घालु को अपने आसन की दिशा में रखना है। दीपक जलाकर महामाया का आवाहन करें और देवी के प्रथम स्वरूप का स्मरण कर उन्हें फल, फूल, बताशा, लौंग आदि नैवेद्य अर्पित कर स्तुति करें।
पड़ोसी देशों से युद्ध दर्शा रही ग्रहों की स्थिति
पंडितों के अनुसार इस बार मां अश्व पर सवार होकर आएंगी और भैंसे पर बैठकर विदाई लेंगी। इस अवधि में ग्रहों की युतियां पड़ोसी देशों से टकराव और रोग-शोक की स्थितियां बनने का संकेत दे रही हैं। ज्योतिषविद् पं. सुनील शास्त्री के अनुसार शनिवार को प्रात:काल सर्वार्थ सिद्धि योग में सूर्य के तुला राशि मेें प्रविष्ट होने पर कलश स्थापना के साथ देवी के प्रथम स्वरूप मां शैलपुत्री की आराधना होगी। इसी समय बुध और चंद्र ग्रह भी तुला राशि में रहेंगे। इन ग्रहों की तुला राशि मेें यह स्थितियां 58 वर्ष बाद होंगी। इन सभी ग्रहों के सम्मिलित प्रभाव से चीन और पाकिस्तान से युद्ध की स्थितियां बनेंगी। साथ ही देश के अंदर बीमारियां बढ़ेंगी और जनजीवन अस्त-व्यस्त रहेगा। कुल मिलाकर यह वर्ष अच्छा नहीं जाएगा। अगले छह माह तक उथल-पुथल भरा माहौल रहेगा और इन स्थितियों में चैत्र नवरात्र आरंभ होने तक कोई सुधार होने की संभावना नहीं है।
पुवायां में महामाई के दरबार में स्थापित हुई पवित्र ज्योति
पुवायां। मां ज्वाला जी जागरण सेवा समिति की ओर से हर वर्ष की तरह इस बार भी क्षेत्र के लोगों को मां ज्वाला जी से आने वाली पवित्र ज्योति और मां वैष्णो देवी से आने वाले अमृत कलश के दर्शन कराए जाएंगे। शुक्रवार को पवित्र ज्योति और अमृत कलश को पुवायां इंटर कालेज के मैदान पर बने महामाई के दरबार में स्थापित कर दिया गया। हालांकि, नवरात्र में होने वाले दुर्गा जागरण का कार्यक्रम इस बार निरस्त कर दिया गया है। समिति के अध्यक्ष धीरज शर्मा ने बताया कि कोरोना महामारी के चलते सरकार की निर्देेशों के अनुसार भीड़ एकत्र नहीं कर सकते हैं। इसीलिए जागरण का कार्यक्रम निरस्त किया गया है। उन्होंने बताया कि शनिवार से नवरात्र शुरू होने पर सुबह दस बजे से शाम पांच बजे तक भक्त ज्योति के दर्शन कर सकेंगे। महामाई के भवन में भक्तों को रुकने नहीं दिया जाएगा और उनके बीच दूरी बनाए रखने के लिए प्रबंध किए गए हैं।