उत्तर रेलवे के मंडल रेल प्रबंधक प्रमोद कुमार ने रविवार को दोपहर यहां आकर स्टेशन के विभिन्न अनुभागीय कार्यालयों और प्लेटफॉर्मों पर उपलब्ध यात्री सुविधाओं का निरीक्षण किया। इस दौरान स्टेशन पर गंदगी और परिसर में वाहन खड़े देख उन्होंने स्टेशन अधीक्षक एके गौतम को आड़े हाथों लेते हुए नाराजगी जताई। शौचालय बंद देख डीआरएम की भवें फिर तन गईं। इस पर वहीं मौजूद सहायक मंडल अभियंता ने बताया कि टॉयलेट में जरूरी काम कराने में करीब दो सप्ताह का समय लगेगा।
जम्मू तवी से चलकर सियालदह जाने वाली 23152 डाउन एक्सप्रेस से उतरे डीआरएम की स्टेशन अधीक्षक एके गौतम, सहायक मंडल अभियंता केके शर्मा, सफाई निरीक्षक त्रिलोक सिंह आदि अधिकारियों ने अगवानी की। चूंकि, डीआरएम कृभको के लिए रेलवे साइडिंग के प्रस्ताव पर उर्वरक फैक्ट्री का दौरा करने के मकसद से यहां आए। इसलिए खाद कारखाने के मुख्य प्रबंधक परिवहन विवेक श्रीवास्तव भी डीआरएम के स्वागत को स्टेशन पर मौजूद रहे।
स्टेशन के मेन गेट से बाहर आकर डीआरएम की निगाह वहां खड़ी गाड़ियों पर अटक गई। स्टेशन कैंपस पर गंदगी छितराई देख उन्होंने स्टेशन अधीक्षक से स्टेशन की चमक फीकी पड़ने की वजह पूछी। एसएस एके गौतम उनके सवाल पर खामोश रहे। बुकिंग काउंटर पर जाकर वहां खड़े यात्रियों से जानना चाहा कि कितनी देर से लाइन में लगे हैं। वहां महिलाओं को खड़ा देख उन्होंने बुकिंग ऑफिस के इंचार्ज को महिलाओं के लिए अलग खिड़की खोलने के निर्देश दिए।
मेन गेट के पास वाला शौचालय बंद देख डीआरएम से एसएस से नाराजगी जताई। हालांकि, वहीं मौजूद एडीईएन केके शर्मा ने उन्हें यह कहकर संतुष्ट किया कि शौचालय के कुछ तकनीकी काम रह गए हैं, जिन्हें दो सप्ताह में पूरा करा लिया जाएगा। कृभको श्याम फर्टिलाइजर्स लिमिटेड रवाना होने से पहले पत्रकारों से संक्षिप्त बातचीत में डीआरएम ने बताया कि एक नंबर प्लेटफॉर्म पर डाउन श्रेणी की ट्रेनों का ठहराव अगले वर्ष जून तक संभव हो पाएगा और इसके लिए ट्रैक में सुधार किया जा रहा है। इस दौरान डीआरएम ने एसएस को स्टेशन के प्लेटफॉर्म नंबर चार व पांच पर गाड़ियों की लोकेशन देने वाले इलेक्ट्रॉनिक डिस्प्ले लगवाने और फुट ओवरब्रिज पर दोनों ओर यात्रियों की सुरक्षा के लिए टिन शेड लगवाने के निर्देश दिए।
कृभको फैक्ट्री में साइडिंग की तलाशीं संभावनाएं
स्टेशन का औपचारिक निरीक्षण करने के बाद डीआरएम ने कृभको के खाद कारखाने में जाकर वहां के अधिकारियों के साथ बैठक की और उर्वरक रैक सप्लाई के लिए स्टेशन से फैक्ट्री तक रेल लाइन डाले जाने के साथ फैक्ट्री के पास रेलवे साइडिंग बनाए जाने की संभावनाओं पर विचार विमर्श किया।
दरअसल, कृभको खाद कारखाना में हर साल करीब दस लाख टन यूरिया उत्पादन होता है। यूरिया की 300 से 350 रेलवे रैक लोड करके अन्य राज्यों को भेजी जाती है। चूंकि, फैक्ट्री के पास रेलवे साइडिंग नहीं है। इसलिए वहां के यूरिया से लोड ट्रक रोजा रेलवे साइडिंग भेजे जाते हैं। वहां ट्रकों से उर्वरक की बोरियां मालगाड़ियों में अनलोड करने में काफी समय लगता है। इसी समस्या को दूर करने के लिए कृभको प्रबंधन की ओर से डीआरएम कार्यालय को फैक्ट्री के पास रेलवे साइडिंग बनाने का प्रस्ताव भेजा गया था। इसी प्रस्ताव पर विचार विमर्श के लिए डीआरएम ने फैक्ट्री के अतिरिक्त महाप्रबंधक पी शेखरन, संयुक्त महाप्रबंधक उत्पादन नीरज अग्रवाल आदि अफसरों के साथ बैठक की। बाद में प्लांट पर जाकर यूरिया उत्पादन की प्रक्रिया भी देखी।