सकट चौथ पर भगवान गणेश की पूजा-अर्चना करतीं महिलाएं। स्रोत: स्वयं
शाहजहांपुर। सकट चतुर्थी का पर्व मंगलवार को श्रद्धा और पारंपरिक उल्लास के साथ मनाया गया। इस अवसर पर माताओं ने व्रत रखकर प्रथम पूज्य भगवान गणेश और माता पार्वती की पूजा की। बाद में सकट भगवान से संबंधित कथा श्रवण कर संतान की दीर्घायु की कामना की। इस मौके पर बच्चों ने प्रतीकात्मक बलि देने के लिए तिल और गुड़ से थाल में बनाया गया बकरा भी काटा।
माघ माह के कृष्ण पक्ष की चतुर्थी तिथि पर सकट चौथ का व्रत रखा गया। माताओं ने अपनी संतान की लंबी उम्र और सुख-समृद्धि के लिए भगवान गणेश की पूजा-अर्चना की। माताओं ने सुबह जल्दी उठकर घर की धुलाई की। इसके बाद स्नानकर सकट चौथ का व्रत रखकर पूजा-अर्चना की। नगर से लेकर ग्रामीण इलाकों तक मंगलवार को सकट चतुर्थी पर्व श्रद्धा और उल्लास के साथ मनाया गया।
पूजन के दौरान महिलाओं ने परंपरागत कथा सुनी और बाद में बच्चों से थाल में गुड़ व तिल से बनाया गया बकरा कुश और चांदी से कटवाया। काटे गए बकरे का सिर कन्याओं को भेंट करने के बाद सभी को तिलकुट का प्रसाद वितरित किया। इस मौके पर तमाम घरों में महिलाओं ने कुटे हुए भुने तिल और चावल के आटा के लड्डू भी बनाए।
श्री रुद्र बालाजी धाम के पंडित डॉ. कान्हा कृष्ण शुक्ल ने बताया कि सकट चौथ का व्रत महिलाओं के लिए केवल एक धार्मिक अनुष्ठान नहीं, बल्कि मातृत्व, त्याग और आस्था का प्रतीक है। यह पर्व परिवार की खुशहाली, बच्चों की सुरक्षा और जीवन में आने वाले संकटों से मुक्ति की कामना से जुड़ा हुआ है।