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ज्यादा छात्रों का एडमीशन करने के लिए लुभावने प्रचार पर बल

Tue, 31 Mar 2015 09:05 PM IST
पुवायां।
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अब वह जमाने नहीं रहे जब स्कूलों में एडमीशन जुलाई में होते थे। वर्तमान सत्र से यूपी बोर्ड से सीबीएसई की तर्ज पर अप्रैल से शिक्षा सत्र शुरू करने के निर्देश दिए हैं। इसे देखते हुए ज्यादा से ज्यादा बच्चों को स्कूल लाने की जुगत में तमाम हथकंडे अपनाए जाने लगे हैं।
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शिक्षा का बाजारीकरण होने के साथ ही स्कूल संचालकों के बीच जबरदस्त प्रतिस्पर्धा शुरू हो गई है। बच्चों की वार्षिक परीक्षा निपटाने के बाद परीक्षा देने वाले बच्चों को अगले सत्र की पुस्तकें आदि खरीदने और लगातार स्कूल आने का फरमान जारी कर दिया गया है। नए प्रवेश भी किए जा रहे हैं। कुछ स्कूल वाले कई तरह से अभिभावक से रुपये ऐंठने की कोशिश में लगे रहते हैं। बढ़िया शिक्षा का झांसा देकर और अपने स्कूल को तमाम सुविधाओं से संपन्न बताकर अभिभावकों से प्रवेश के नाम पर भारी रकम वसूली जाती है। स्कूल के प्रचार में भी झूठे दावे किए जा रहे हैं। इसके अलावा स्कूल से ही कापी, किताब से लेकर बस्ता, ड्रेस, टाई यहां तक कि जूते, मोजे तक बेचे जाते हैं। कुछ स्कूल संचालक पुस्तक प्रकाशकों और पुस्तक विक्रेताओं से साठगांठ कर अभिभावकों को संबंधित प्रकाशन की पुस्तकें खरीदने को विवश कर रहे हैं, कारण बदले में उन्हें मिलने वाला कमीशन है।  

यह हैं प्रचार के तरीके
पुवायां। स्कूल संचालकों को प्रचार का जो तरीका सबसे पसंद आ रहा है वह है आफसेट मशीन पर बढ़िया कलर में पर्चे छपवाकर वितरित कराने का। इसके अलावा माइक से स्कूल की विशेषताएं बताते हुए प्रचार किया जा रहा है। पोस्टर और बैनर भी प्रचार का हिस्सा बन गए हैं। इसके अलावा कुछ स्कूलों के शिक्षक घर-घर संपर्क कर अभिभावकों को स्कूल की खूबियां बताकर बच्चों को एडमीशन के लिए प्रेरित कर रहे हैं। कुछ स्कूलों में शिक्षकों को रखे जाने के समय उनसे 10 से 20 छात्रों का एडमीशन कराने की शर्त रखी जा रही है। उनसे कहा जा रहा है कि यदि स्कूल में पढ़ाना है तो अपने संपर्क के लोगों के बच्चों का एडमीशन स्कूल में कराएं।
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