हजरत इमाम हुसैन की शहादत की याद में मुस्लिम बस्तियों में पूरी रात ताजियों के साथ ढोल नगाड़े बजते रहे। सुबह होते ही शहीद भगत सिंह इंटर कॉलेज के सामने मुरादपुर, रामनगर, कुंवरपुर रत्ती के ताजिएदार एकजुट होकर जुलूस निकालकर करबला तक ले गए। करबला खानखा मस्जिद के लाला मियां ने हजरत इमाम हुसैन की शहादत के बारे में बताया। उन्होंने कहा कि यजीदी फौज ने हजरत के काफिले को मैदान-ए-करबला (इराक) में घेर लिया गया। इस बीच तीन दिन चले युद्ध में सैकड़ों लोग अपनों से जुदा हो गए। इस दौरान आशिक-ए-रसूल सहित 72 लोग करबला के मैदान में भूखे प्यासे शहीद हो गए। उन्हीं की याद में मोहर्रम मनाया जाता है। इस मौके पर रजा हुसैन, मोहम्मद इसहाक, बुंदन, नवी हसन, अकील खां, असलम, रहीसुद्दीन, सलीम, कुदरत, शमसुल, शरीफ, सलीम, इकलाख, इमदाद, फारूख आदि का विशेष योगदान रहा।
सेहरामऊ दक्षिणी। क्षेत्र के गांव कुतुबापुर, बंजारनपुरवा स्थित करबला में गमगीन माहौल में ताजिए दफन किए गए। इस मौके पर लगे मेले में जुम्मनपुरवा, लक्ष्मणपुर, सेहरामऊ दक्षिणी आदि गांवों से आए महिला, पुरुष और बच्चों ने मेले में जमकर खरीददारी की। मेला में ताजिएदार सफरद्दीन का सहयोग रहा।