बड़े शहरों की ओर असंगठित क्षेत्र के मजदूरों का पलायन रोकने के संबंध में किए गए शोध के आधार पर दिल्ली विश्वविद्यालय की असिस्टेंट प्रोफेसर डॉ. चंद्रकांता का कहना है कि देश के छोटे शहरों में कृषि, हस्तकला और अन्य क्षेत्रों में रोजगार के अवसर विकसित किए जाने चाहिए। माता-पिता के साथ छुट्टियां बिताने आईं डॉ. चंद्रकांता ने महिला मजदूरों को हस्त कौशल प्रशिक्षण देकर उन्हें कुशल कामगार की श्रेणी में लाए जाने की जरूरत भी बताई।
गन्ना शोध संस्थान में अनुदेशक पद पर कार्यरत मानेंद्र सिंह वर्मा और सविता देवी की चार संतानों में दूसरे नंबर की चंद्रकांता ने अधिकांश पढ़ाई शाहजहांपुर के आर्य महिला इंटर कॉलेज और जीएफ कॉलेज से की। इंटरमीडिएट उत्तराखंड के काशीपुर शहर से किया। भूगोल में एमए और एमफिल करने के बाद वर्ष 2010 में देश की राजधानी दिल्ली जाना हुआ तो वहां असंगठित मजदूरों की सरकार के स्तर से उपेक्षा होते देख श्रमिकों की दशा को ही उन्होंने अपने शोध का विषय बना लिया।
डॉ. चंद्रकांता के अनुसार शोध से पता चला कि मजदूरों के मूल निवास और आसपास काम के अवसर बेहद कम होने के कारण वह महानगरों की ओर भागने को विवश हो रहे हैं। उन्होंने कहा कि छोटे शहरों में वहां के संसाधनों पर आधारित छोटे उद्योगों का विकास हो तो श्रमिकों को अपना गांव और घर नहीं छोड़ना पड़ेगा। उनकी रिसर्च को यूनाइटेड नेशंस के सहयोग से फ्रांस, केन्या, स्वीडन, फिनलैंड आदि देशों में भी ख्याति मिली।