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पारा 3.3 डिग्री गिरी, बढ़ी सर्दी

Wed, 16 Dec 2015 11:17 PM IST
शाहजहांपुर।
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सर्दी ने तेवर तीखे करने शुरू कर दिए गए हैं। दिन ढलने के बाद से लेकर पूरी रात और सुबह दिन निकलने के बाद तक कोहरा गिरने के साथ ठंडी हवा चलने से पारा 3.3 डिग्री सेल्सियस गिर गया। ठंडी हवा से दिन में खिली हल्की धूप बेदम साबित हुई। बदन में नश्तर जैसी चुभने वाली शीतलहर ने जनजीवन को बेहाल करना शुरू कर दिया है।
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बीते दिन गन्ना शोध परिषद केे मौसम अनुभाग में रात का तापमान आठ डिग्री सेल्सियस रिकार्ड किया गया था। बुधवार को दोपहर बाद हल्की धूप खिलने से दिन के तापमान में पिछले 24 घंटे के दौरान करीब एक डिग्री सेल्सियस की वृद्धि दर्ज की गई, लेकिन घना कोहरा छाए रहने से रात का तापमान घटकर 4.7 डिग्री सेल्सियस रह गया। परिषद के मौसम विश्लेषक सुरेंद्र सिंह यादव के अनुसार बृहस्पतिवार से दिन के तापमान में गिरावट का दौर शुरू हो जाने का अनुमान है, क्योंकि कोहरा से वातावरण में बढ़ रही नमी तापमान घटाने में अहम भूमिका निभा रही है।

रबी फसलों के लिए लाभकारी होगा तुषारापात
कोहरे की अधिकता अधिक होने अर्थात उसकी सघनता बढ़ने पर पानी की नन्हीं बूंदें आसमान से गिरना शुरू हो जाती हैं। इसे पाला गिरना या फिर तुषारापात भी कहते हैं, लेकिन सर्दियों के मौसम की यह स्थिति रबी सीजन की गेहूं, चना, मटर आदि के लिए लाभकारी होगी। जिला कृषि अधिकारी अखिलानंद पांडेय के अनुसार तापमान कम होने से गेहूं की फसल तेजी से बढ़वार लेगी और बालियों में दाना पड़ने पर उनका आकार भी बढ़ेगा।
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आलू और अन्य सब्जियों का कोहरे से करें बचाव
कृषि अधिकारियों और शस्य वैज्ञानिकों का मानना है कि कोहरे की अधिकता आलू में झुलसा रोग पैदा करने के साथ गोभी, बैंगन, टमाटर आदि फसलों में कीट रोग पनपने का खतरा बढ़ जाता है। उनकी सलाह है कि आलू समेत सब्जियों के खेतों में शाम के समय सिंचाई करें, जिससे कि ताजा पानी खेत का तापमान घटने से रोके। इसी तरह इन दिनों उर्वरकों में सल्फर की मात्रा बढ़ा देनी चाहिए। खेत के पूर्व और उत्तर दिशा में शाम के वक्त कूड़ा-कंडे आदि सुलगा देने से ऊपर उठा धुआं खेत पर अपनी परत बनाकर कोहरा नीचे आने से रोकेगा।

तापमान की अधिकता से गेहूं में निकलीं बालियां
दिसंबर में अधिकतम तापमान 15 डिग्री सेल्सियस के आसपास होना चाहिए, लेकिन परा 22 से 24 डिग्री सेल्सियस के बीच झूलता रहा। यही वजह रही निगोही के गांव गिरगिचा और अन्य कई स्थानों से गेहूं के खेतों में बालियां निकलने की सूचना मिली। यह समस्या उन क्षेत्रों में ज्यादा पनपी, जहां के सिख फार्मरों ने पंजाब के तापमान आधारित फसली पैटर्न को अपनाते हुए गेहूं की बुवाई नवंबर के पहले सप्ताह के बजाय अक्तूबर के पहले-दूसरे सप्ताह में कर दी थी। अपरिपक्व पौधों में बालियां देख किसान घबराएं नहीं, क्योंकि तापमान कम होने के साथ यह समस्या स्वत: खत्म हो जाएगी। - डॉ. केएम सिंह, शस्य विज्ञानी, कृषि विज्ञान केंद्र
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