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नेक पहल: एमबीबीएस के छात्रों ने 300 परिवारों को लिया गोद, तीन साल तक उठाएंगे सेहत का जिम्मा

Mon, 17 Oct 2022 12:42 AM IST
बरेली ब्यूरो अमर उजाला नेटवर्क, शाहजहांपुर

सार

शनिवार को शाहजहांपुर के जिगनेरा गांव में हुए आयोजन में प्रत्येक छात्र को तीन परिवार को गोद लेने की जिम्मेदारी दी गई। डॉक्टरों ने विद्यार्थियों को गोद लेने के बाद समुदाय को लेकर दायित्व भी समझाए।
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सांकेतिक तस्वीर - फोटो : फाइल फोटो
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विस्तार
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शाहजहांपुर में कांट-जलालाबाद रोड पर स्थित जिगनेरा गांव के 300 परिवारों की सेहत की निगरानी राजकीय मेडिकल कॉलेज में एमबीबीएस करने वाले 100 छात्र करेंगे। शनिवार को गांव में हुए आयोजन में प्रत्येक छात्र को तीन परिवार को गोद लेने की जिम्मेदारी दी गई। डॉक्टरों ने विद्यार्थियों को गोद लेने के बाद समुदाय को लेकर दायित्व भी समझाए।

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राजकीय मेडिकल कॉलेज के भवन से कुछ दूरी पर जिगनेरा गांव स्थित है। गांव की स्थिति काफी ज्यादा खराब है। सड़कें भी बेहतर नहीं है। जलनिकासी तक का इंतजाम नहीं है। अधिकतर मेहनत-मजदूरी करने वाले लोगों का गांव में आशियाना है। गांव करीब तीन हजार की आबादी वाला है। शनिवार को गांव में विश्व हैंडवॉश डे पर हुए आयोजन में प्राचार्य डॉ. राजेश कुमार, एसीएमओ डॉ. रोहताश, डॉ. एमपी गंगवार, डॉ. मीना गोयल, संयोजक जेपी सिंह ने छात्र-छात्राओं को परिवार को गोद लेने की प्रक्रिया को पूर्ण कराया।

प्राचार्य ने बताया कि एक छात्र को तीन परिवारों की जिम्मेदारी दी गई। 100 छात्र तीन सौ परिवारों के बच्चों, बुजुर्गों, नौजवानों की स्वास्थ्य पर नजर रखेंगे। तीन साल तक बराबर निगरानी करेंगे। छात्र-छात्राएं बराबर गांव का भ्रमण कर परिवारों को स्वास्थ्य के प्रति जागरुक करेंगी। बच्चों का टीकाकरण और बीमारों का उपचार करने का काम भी करेंगे।
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गांव की पृष्ठभूमि से रुबरू होंगे छात्र
समुदाय और डॉक्टर के बीच की दूरी को कम करने का यह बेहतर तरीका है। परिवारों को गोद लेने के बाद छात्र गांवों की पृष्ठभूमि को जान सकेंगे, साथ ही उनकी समस्या भी समझ सकेंगे। - डॉ. राजेश कुमार, प्राचार्य

अहम रोल अदा करने का प्रयास
तीन परिवारों की जिम्मेदारी उठाने का मौका मिला है। यह एक चुनौती के तौर पर लिया है। प्रयास है कि गोद लिए परिवारों के घर के लोगों को स्वस्थ रखने में अहम रोल अदा कर सकें। - डिंपल मंधान

ग्रामीणों की तकलीफों को करेंगे दूर
गांवों के लोगों के बीच जाकर उनकी समस्याओं को समझने का अवसर मिला है। उनके दुख-तकलीफ को समझेंगे, तभी डॉक्टर बनने के बाद उनके साथ सहानुभूति पूर्वक व्यवहार कर सकेंगे। - दृष्टि वार्ष्णेय

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