परिषदीय स्कूलों में शिक्षा का स्तर सुधारने के लिए नगर क्षेत्र में शैक्षिक गुणवत्ता संवर्धन संगोष्ठी रोटी गोदाम स्कूल परिसर में हुई। इसमें परिषदीय, सहायता प्राप्त स्कूलों और सहायता प्राप्त मदरसों के शिक्षक शामिल हुए। संगोष्ठी में शिक्षा की गुणवत्ता बढ़ाने के लिए शिक्षक डायरी, छात्र प्रोफाइल और स्कूल प्रबंधन प्रपत्र तीन महत्वपूर्ण बिंदु बताए गए।
संगोष्ठी में पहुंचे शिक्षा अधिकारियों ने गुरुजनों के आपसी संवाद करके उन लोगों को शैक्षिक गुणवत्ता के प्रति जागरूक किया। इस दौरान जिला समन्वयक प्रशिक्षण सुशील बाबू मिश्र ने शिक्षकों से पूछा कि कक्षा एक की हिंदी की किताब के पहले पाठ का नाम क्या है? इस कुछ वहां सन्नाटा छा गया। करीब तीन मिनट के बाद एक शिक्षिका ने पाठ का नाम और वह कविता सुनाई।
मिश्र ने कहा कि सतत व्यापक मूल्यांकन के उद्देश्य को पूरा करके गुणवत्तापरक शिक्षा दी जा सकती है। बताया कि कक्षा में गुरू सिर्फ बच्चे का मूल्यांकन नहीं करता है, बल्कि बच्चे भी उनका मूल्यांकन करते हैं। कहा कि यदि किसी विद्यालय के बच्चों का ज्ञान अच्छा नहीं है, तो उस अध्यापक के अंदर कुछ न कुछ कमी जरूर होती है। बच्चों में पाठन क्षमता का विकास करना होगा, ऐसा न करने पर शिक्षक के कॅरियर पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ सकता है।
भावलखेड़ा ब्लाक के खंड शिक्षा अधिकारी ने शिक्षकों से कहा कि जिस विभाग से हमें रोजी-रोटी मिल रही है, हमारा कर्तव्य है कि हम उसके लिए प्रयास करें। नगर शिक्षा अधिकारी मुन्नालाल त्रिवेदी ने कहा कि शासनादेश का पालन करते हुए ही कार्य करें। एमडीएम के जिला समन्वयक निश्चय सिंह ने कहा कि विद्यालयों में भेजी नई एमडीएम पंजिका में एक अप्रैल से सूचनाएं भरना शुरू कर दें। इस मौके पर सह-समन्वयक संदीप मिश्रा, नीरज वर्मा, इमरान सईद, सीमा आहूजा, रीता सक्सेना ने भी विचार व्यक्त किए। इस मौके पर सैयद मंजूर हसन, संजय डोनाल्ड, हिमांशु दीक्षित, पूजा सिंह, खुशबू सबूर, रचना जौहरी, शोभित श्रीवास्तव, ममता सिंह, मधूरिमा, कामिनी, आलिया, नाहीद सुल्ताना, मोहम्मद आदिल, अतहर कादरी आदि मौजूद रहे।