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लॉकडाउन में लटकी शादियां, सहालगों में नहीं बज रहीं शहनाइयां

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शाहजहांपुर। लॉकडाउन में वैवाहिक आयोजन अधर में लटक गए हैं। तमाम घरों में बेटियों की विदाई और बेटों के सिर पर सेहरा सजाने के अरमानों पर पानी फिर गया है। सहालगी सीजन बीते मार्च से शुरू हो चुका है, अब तक लगभग 200-250 वैवाहिक समारोह टल चुके हैं। अपवाद के तौर पर कुछ शादियां हुई भीं, लेकिन उनमें न तो शहनाइयों की गूंज सुनने को मिली और न ही बैंड-बाजों का धूम-धड़ाका। महानगर के तमाम मैरिज लॉन खाली पड़े हैं, जबकि इन दिनों उनकी बुकिंग कराने मेें खासी कठिनाई होती थी। सहालगी सीजन 29 जून तक है।
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लॉकडाउन के दूसरे चरण में जिले को 20 अप्रैल से कुछ रियायतेें मिलने की उम्मीद बढ़ी है, लेकिन जिन घरों में शादियां होनी हैं, उन परिवारों को नहीं लगता कि इस मौके पर पारंपरिक धूमधाम करने की छूट मिल पाएगी। लोगों को यह उम्मीद भी नहीं है कि दूरदराज के अन्य शहरों मेें रहने वाले मेहमान शादी का बुलावा मिलने पर बेटे-बेटियों को आशीर्वाद देेने आएंगे। पिछले साल इन्हीं दिनों मेें विवाह के ढाई दर्जन से ज्यादा शुभ मुहूर्त निकले थे और महानगर समेत जिले के ग्रामीण क्षेत्रों में 500 से ज्यादा शादियां हुई थीं। इस बार मार्च के शुरुआत से ही विवाह मुहूर्तों को कोरोना का ग्रहण लग गया।
इधर, जिन लोगों ने विवाह की खरीददारी समेत अन्य तैयारियां पूरी कर लीं, उन पर कोरोना की पाबंदियों के तहत पंडित के अलावा दोनों पक्षों के अधिकतम छह लोगों को बुलाने की बाध्यता लागू हो गई। आयोजन फीके रहने की आशंका में तमाम लोगों ने मैरिज लॉन, कैटरिंग, बैंड बाजा की बुकिंग कैंसिल कर दी। चूंकि, विवाह की दोनों पक्ष तैयारी कर चुके थे, इसलिए यह भी पता नहीं चला कि कब बरात आई और कब बेटी की डोली उठकर चली गई। शुक्रवार शाम महानगर के मोहल्ला खलीलशर्की में यही हुआ।
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खामोशी से आई बरात, सादगी से विवाह
अंबा मोड़ के पास रहने वाले एक परिवार की बेटी ब्याहने के लिए पांच लोगों की बरात बेहद खामोशी से आई। घर की महिलाओं ने बरातियों के लिए खाना पकाया, दोनों परिवारों ने साथ बैठकर सहभोज किया। आधी रात बाद ब्रह्म मुहूर्त में भांवरे पड़ीं और सुबह चार बजे बेटी की विदाई हो गई। आसपास के लोग कलेवा का न्योता करने आए तो पता चला कि बिटिया तो ससुराल जा चुकी है। बरातों पर पाबंदी होने से बरात घर स्वामी, सराफा कारोबारी, बैंड-बाजे वाले, कैटरर्स और उनसे जुड़े कर्मचारी भी बेहद उदास हैं। हालांकि, इन सभी को उम्मीद है कि एक-दो माह में हालात सामान्य होने पर नवंबर से सहालगों का दूसरा दौर शुरू होने पर उनका कारोबार भी परवान चढ़ेगा।
शहर में छोटे-बड़े करीब 40 मैरिज लॉन हैं। आठ-दस बारात घर तहसीलों-कस्बों में हैं और सभी ने सहालगी सीजन के लिए बुकिंग कर रखी थी। लॉकडाउन की वजह से सारी बुकिंग कैंसिल कर दी गई हैं, लेकिन कर्मचारियों को पगार अपनी जमा-पूंजी से देनी पड़ रही है। अब जो लोग बारात घर बुक कराने आ रहे हैं, उन्हेें इंतजार करने को कहा जा रहा है।
- इजहारुल हक उर्फ खान मियां, मैरिज लॉन स्वामी
पिछले साल विवाह वाले घरों को पंडित बड़ी कठिनाई से मिल रहे थे, लेकिन इस वर्ष होली के बाद से खाली बैठना पड़ रहा है। नवरात्र के दिन भी खाली निकल गए। यद्यपि अभी 15 से ज्यादा शुभ मुहूर्त हैं। विवाह की अंतिम शुभ तिथि आषाढ़ शुक्ल पक्ष की भार्या नवमी को है। लॉकडाउन खुलने पर शादियां कराने का अवसर मिल सकता है।
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- पं. सुनील शास्त्री, ज्योतिषविद् एवं कर्मकांडी
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