केंद्र सरकार द्वारा पांच सौ और एक हजार के पुराने नोटों पर पाबंदी लगाए जाने और मांग के अनुरूप बाजार में नई करेंसी नहीं पहुंचने से जिले में उर्वरकों की बिक्री का ग्राफ गिर गया है। रबी फसलों की बुवाई के दौर में यूरिया और डीएपी खरीदने के लिए किसानों के पास कैश ही नहीं है। डीएपी की बिक्री में भारी गिरावट से गेहूं, चना समेत कई फसलों की बुवाई पिछड़ रही है और व्यापार भी चौपट हो रहा है।
धान की फसल कटने के साथ ही किसान रबी सीजन की अगली फसलों के लिए यूरिया, डीएपी, एनपीके आदि रासायनिक उर्वरकों का बंदोबस्त करने में जुट जाते हैं। बुवाई के बाद रबी सीजन पीक पर होने की दशा में इन सभी उर्वरकों के लिए बीते वर्षों में किसानों के बीच मारामारी तक की नौबत आ चुकी है। इसे देखते कृषि विभाग ने पर्याप्त मात्रा में उनकी उपलब्धता पहले से सुनिश्चित कर ली।
इसके लिए जिले के करीब 1200 थोक और फुटकर उर्वरक विक्रेताओं भी अपने प्रतिष्ठानों पर रासायनिक खादों का पर्याप्त स्टाक रख लिया। खाद-बीज खरीदने के लिए किसान दुकानों पर पहुंच भी रहे हैं, लेकिन उनके पास खरीदने के लिए नई करेंसी के बजाय बंद किए जा चुके पांच सौ और एक हजार के पुराने नोट हैं। किसानों के यह नोट न तो बदले जा रहे और न ही उनके खातों में जमा हो रहे हैं क्योंकि जिला सहकारी बैंक को करेंसी की सप्लाई ठप है।
यही नहीं, किसानों से खाद-बीज के बदले स्वीकार किए जा रहे चेक बैंक शाखाओं से लौटाए जा रहे हैं क्योंकि वहां भी नो कैश के बोर्ड लटकते मिलते हैं। ऐसी स्थिति में उर्वरक विक्रेता किसानों से चेक लेने में भी संकोच कर रहे हैं। नतीजे में उनका माल डंप होने के साथ निर्माता कंपनियों का टर्न ओवर गड़बड़ा रहा है। किसानों की क्रय शक्ति पर करेंसी की मार से रबी सीजन की बुवाई लेट हो रही है। हालांकि, कृषि विभाग के अधिकारी 65-70 फीसदी बुवाई होने का दावा कर रहे, लेकिन यह बता पाने की स्थिति मेें नहीं हैं कि बाकी 30 फीसदी रकबा कब तक आच्छादित होगा।
छापेमारी से दहशत का माहौल
करेंसी के संकट के दौर में माप विज्ञान और खाद्य सुरक्षा विभाग की छापेमारी और इस मुद्दे पर व्यापार संगठनों की खामोशी को लेकर उर्वरक, बीज और कृषि रक्षा रसायन विक्रेता खासे खफा हैं। फर्टिलाइजर्स एंड पेस्टीसाइड्स एसोसिएशन के जिलाध्यक्ष राकेश कुमार गुप्ता के अनुसार नोटों की कमी से परेशान लोेगों को राहत पहुंचाने वाले प्रयास करने के बजाय सरकारी विभागों से छापेमारी कराकर बाजार में दहशत का माहौल बनाया जा रहा है।
सहकारिता विभाग से मदद की उम्मीद
खाद-बीज नहीं खरीद पाने के संकट से जूझ रहे किसानों को उबारने में सहकारिता विभाग मददगार साबित हो सकता है, लेकिन आरबीआई ने नोट बदलने की प्रक्रिया से सहकारी बैंकों को अलग रखकर उसे नाराज कर रखा है। किसानों को राहत से जुड़े सवाल पर सीडीओ टीके शिबु ने कहा कि कृषि कार्य के लिए भुगतान को आरबीआई के नए नोटिफिकेशन पर सख्ती से अमल कराया जाएगा। साथ ही ऋण आधार पर खाद-बीज उपलब्ध कराने के लिए कोऑपरेटिव सेक्टर में संभावना तलाश की जा रही है।
डीएम से आज मिलेंगे कंछल गुट के व्यापारी
कृषि और व्यापार क्षेत्र में करेंसी की कमी दूर कराने के लिए उद्योग व्यापार प्रतिनिधिमंडल कंछल गुट के पदाधिकारी सोमवार को डीएम राम गणेश से भेंट करेंगे। नगर अध्यक्ष सचिन बाथम ने बताया कि बाद में एसबीआई के रीजनल मैनेजर से भेंट कर उन्हें भी ज्ञापन दिया जाएगा।