इस्राइल-अमेरिका और ईरान के युद्ध के बीच शाहजहांपुर जिले के कई युवा खाड़ी देशों में फंस गए हैं।निगोही क्षेत्र के लोहरगवां गांव निवासी वसीम अबू धाबी में फंसे हुए हैं। उन्होंने वहां से अपने पिता को वीडियो कॉल कर वहां के हालात के बारे में बताया।
शाहजहांपुर जिले से एक वर्ष पहले संयुक्त अरब अमीरात की राजधानी अबू धाबी में इलेक्ट्रीशियन का काम करने गए वसीम खां ने घरवालों को वीडियो कॉल करके वहां युद्ध के रोंगटे खड़े कर देने वाले भयावह हालात बताए। उनके अलावा गांव के तीन अन्य युवक भी खाड़ी के युद्धग्रस्त क्षेत्र में फंस गए हैं। इससे उनके परिजन चिंतित हैं।
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अबू धाबी की मुस्तफा सिटी के इंडस्ट्रियल एरिया में रह रहे वसीम ने अपने पिता जुबैर हसन को बताया कि घर की छतों के ऊपर से रोजाना अनगिनत मिसाइलें गुजरती हैं। आसपास के क्षेत्रों से तेज धमाकों की आवाज आती रहती है। इससे घरों के खिड़की और दरवाजे हिलने से ऐसा लगता है, मानो भूकंप आ गया हो। अपनों से हजारों मील दूर बैठकर पिता से बात करते हुए वसीम भावुक हुए तो उनके पिता की आंखों से भी आंसू छलक पड़े। हालांकि, वसीम के यह बताने से उनके घरवालों को थोड़ी तसल्ली मिली कि हालात बहुत खराब हैं, लेकिन सरकार सभी नागरिकों को खाना बांट रही है और किसी को कोई दिक्कत नहीं होने दे रही है।
सुल्तान के महल में कर रहे बिजली फिटिंग
वसीम ने घरवालों को यह भी बताया कि वह आजकल अबू धाबी के सुल्तान के महल में बिजली फिटिंग का कार्य कर रहे हैं। इसके लिए उन्हें अपने आवास से करीब 65 किमी दूर जाना होता है, लेकिन रास्ते में बहुत ही दहशत का माहौल है। हमेशा डर बना रहता है कि पता नहीं किधर से मिसाइल आए और सब कुछ तबाह बर्बाद कर दे।
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उन्होंने बताया कि शनिवार 12 बजे से मिसाइलों से लगातार धमाके हो रहे थे। इसी गांव के सुहेल खां, आमिर खां, और तस्लीम खां भी खाड़ी के युद्धग्रस्त क्षेत्र में मिसाइलों की बारिश के बीच घिरे हुए हैं। इसलिए उनके घर वाले भी अपने लाड़लों की सलामती और अमन के लिए दुआएं करने के साथ भारत सरकार से उनकी वतन सकुशल वापसी की गुहार लगा रहे हैं।