बीते चार दशकों से मैलानी फर्रूखाबाद के बीच रेलवे लाइन बिछने का सालों से इंतजार कर रहे लोगों को इस बार यह सपना पूरा होने की आस बंधी है। रेलवे की उक्त मिसिंग लिंक को पूरा कराने को नार्थ ईस्टन रेलवेे गोरखपुर द्वारा तीन साल पहले से कराये जा रहे विभिन्न तरह के सर्वे कार्य पूरे कराकर रिपोर्ट रेल मंत्रालय को भेजी जा चुकी है। लाइन निर्माण की दिशा में खास बात यह भी है कि अभी तक आर्थिक दृष्टि से हानिकारक होना दर्शाकर ठंडे बस्ते के हवाले कर दी जाने वाली यह लाइन इस बार के विभागीय सर्वे में 3.64 प्रतिशत लाभकारी होना स्वीकारी गई है।
करीब चार दशक पहले पीलीभीत के तत्कालीन सांसद मोहन स्वरूप द्वारा इस रेलवे लाइन को बिछवाये जाने की संसद में उठाई गई आवाज के बाद इसको लेकर जनता के स्वर भी तेज हो गये परन्तु उपभोक्ता संरक्षण द्वारा किये गये विभिन्न तरह के प्रयासों के बाद इस आंदोलन को सही दिशा मिली। 1997 से लेकर 2003 तक उत्तर रेलवे की देखरेख में तीन सर्वे जरूर कराये गये परंतु हर सर्वे में इस लाइन को विभाग के लिये आर्थिक तौर पर हानिकारक होना बताकर ठंडे बस्ते के हवाले किया जाता रहा। चुनाव के दौरान मुददा बनाकर बाद में भुला देने वाली हमारे जनप्रतिनिधियों की प्रवृत्ति भी इस मांग को पूरा होने में रोड़ा बनी रही। हालांकि उपभोक्ता संरक्षण मंच के लगातार प्रयासों के बाद 2011 में तत्कालीन रेल मंत्री ममता बनर्जी ने इस रेलवे लाइन के सर्वे को पुन: मंजूरी दी जिसे मंच के पदाधिकारी बराबर फालो करते रहे। नार्थ ईस्टर्न रेलवे गोरखपुर द्वारा 2013 में उक्त रेलवे लाइन के लिये शुरू की गई कवायद के बाद यातायात, सिग्नल, सिविल मैकेनिक तथा बिजली समेत विभिन्न तरह के सर्वे कार्य बीते साल के अंत तक पूरे करके अपनी रिपोर्ट केंद्र सरकार को भेज दी गई।
13 अरब की लागत का भेजा प्रस्ताव
गोरखपुर रेलवे द्वारा कराये गये सर्वे की जो रिपोर्ट सरकार को भेजी गई है उसके मुताबिक उक्त रेलवे लाइन फर्रूखाबाद, अल्हागंज, जलालाबाद, कांट तथा बंथरा होती हुई बरेली की मेन लाइन से जोड़ी जाएगी। करीब 154 किलोमीटर लंबी इस लाइन की लागत 13 अरब रुपये आंकी गई है। साथ ही यातायात सर्वे में भी इस लाइन को 3.64 प्रतिशत लाभकरी होना दर्शाया गया है। उपभोक्ता संरक्षण मंच द्वारा दो महीने पहले गोरखपुर रेलवे से आरटीआई के तहत यह जानकारी हासिल की गई थी।