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Shahjahanpur News: साढ़े पांच लाख आबादी पर सीमित कर्मचारी...सफाई व्यवस्था नाकाफी

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मजहर हुसैन, पार्षद
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शाहजहांपुर। करोड़ों रुपये खर्च होने के बावजूद शहर की सफाई व्यवस्था पटरी पर नहीं आ पा रही है। इस स्थिति के लिए नगर निगम में सफाई कर्मचारियों की कमी, वार्डों में असमान तैनाती, सार्वजनिक शौचालयों की बदहाल स्थिति और आउटसोर्सिंग कंपनियों पर कर्मचारियों का वेतन व ईपीएफ रोकने जैसे गंभीर आरोप सामने आए हैं। इन खामियों का खामियाजा सीधे शहर की साढ़े पांच लाख आबादी को भुगतना पड़ रहा है।
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नगर निगम में नियमित, संविदा और आउटसोर्सिंग समेत करीब 1400 सफाई कर्मचारी कार्यरत हैं। इनमें लगभग 200 कर्मचारी कंप्यूटर ऑपरेटर, चालक, माली सहित अन्य कार्यों में तैनात हैं। शासन के हेल्थ मैन्युअल के अनुसार प्रत्येक 10 हजार की आबादी पर 28 सफाई कर्मचारी होने चाहिए, लेकिन शाहजहांपुर में यह मानक पूरा नहीं हो रहा है।
तकरीबन पांच सौ कर्मचारी और चाहिए। कई वार्डों में निर्धारित संख्या से कम सफाई कर्मचारी तैनात हैं, जबकि कुछ वार्डों से कर्मचारियों को हटाकर दूसरे क्षेत्रों में भेज दिया गया है। इससे कई मोहल्लों में नियमित सफाई नहीं हो पा रही है। खासतौर पर बाडूजई, जलालनगर, तारीन टिकली, खिरनीबाग, चौक, अजीजगंज, निसरजई, मोहल्ला हद्दफ, बिजलीपुरा आदि मोहल्लों में सफाई व्यवस्था को लेकर काफी दिक्कत है।
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कर्मचारी संगठन का आरोप है कि सार्वजनिक शौचालयों पर तैनात महिलाओं से सुबह छह बजे से शाम छह बजे तक काम कराया जाता है, लेकिन उन्हें पूरे महीने के बजाय केवल 26 दिनों का वेतन दिया जाता है। शहर के कई सार्वजनिक शौचालय भी जर्जर हो चुके हैं। कई स्थानों पर सीटें और पानी की व्यवस्था खराब है, लेकिन मरम्मत नहीं कराई जा रही। इससे लोगों को परेशानी उठानी पड़ रही है।
करीब दो वर्ष पहले डोर-टू-डोर कूड़ा उठान का कार्य करने वाली ट्रिपल एम इंडिया कंपनी ने लगभग 200 कर्मचारियों का ईपीएफ अब तक जमा नहीं कराया। वहीं जोन-4 में कार्यरत ग्रीनटेक इंडिया कंपनी पर आठ कर्मचारियों से छह महीने तक काम कराने के बाद भी वेतन नहीं देने तथा नौकरी दिलाने के नाम पर 60-60 हजार रुपये लेने के आरोप लगाए गए हैं।

कूड़ा उठान की व्यवस्था ध्वस्त

नगर निगम क्षेत्र में अलग-अलग स्थानों पर 26 डंपिंग ग्राउंड बनाए गए हैं। जहां कूड़ा निस्तारित किया जाता है। नगर निगम के अधिकारियों का कहना है कि प्रतिदिन शहर से लगभग 150 मीट्रिक टन कूड़े का उठान होता है। शहर में कूड़ा उठान की व्यवस्था के लिए 50 ई-रिक्शा लगाए गए हैं। इन पर घर-घर से कूड़ा कलेक्शन का जिम्मा है, लेकिन ये कुछ ही मोहल्लों में चल रहे हैं। इसके साथ ही कूड़ेदान भी नदारद हैं। इसकी वजह से गंदगी फैली रहती है। कूड़ा उठान के लिए नगर निगम के पास 12 ट्रैक्टर-ट्रॉली, 6 छोटे ट्रैक्टर-ट्रॉली, दो टाटा मैजिक वाहन, तीन जेसीबी, एक लोडर और तीन कंटेनर हैं।

क्षेत्र की आबादी 25 से 30 हजार के बीच है। नगर निगम की ओर से मात्र 15 सफाई कर्मचारी लगाए गए हैं। जरूरत इससे दोगुने कर्मचारियों की है। इससे सफाई व्यवस्था दुरुस्त नहीं रह पाती।
-मजहर हुसैन, पार्षद बिजलीपुरा



सफाईकर्मियों की कमी को दूर किया जाना चाहिए। इसके अलावा उनकी समस्याओं का भी निदान हो। ऐसे सफाईकर्मियों को हटा देना चाहिए जो काम नहीं करते और केवल वेतन उठाते हैं।
-प्रदीप कुमार वाल्मीकि, प्रदेश महामंत्री, उप्र सफाई कर्मचारी संघ


शौचालय पर काम करती हूं लेकिन समय से वेतन नहीं मिलता। पांच महीने से शौचालय को साफ करने के लिए सामग्री नहीं मिली। अपने पास से सामग्री खरीदनी पड़ती है।
-सीमा

कर्मचारी नाली से कूड़ा निकालकर चले जाते हैं, पर उसे उठाने वाला नहीं होने पर फिर से गंदगी फैल जाती है। छुट्टा जानवर सबसे ज्यादा गंदगी फैलाते हैं। इसकी ओर भी नगर निगम को ध्यान देना चाहिए।
-रवींद्र पाल प्रजापति, बीबीजई हद्दफ

मोहल्ले में सफाई कर्मचारी पर्याप्त नहीं हैं। सफाई होने के बाद भी कूड़े के ढेर लगे रहते हैं। इसे लेकर नगर आयुक्त से पत्राचार भी किया, लेकिन समस्या का समाधान नहीं हुआ है।
- वकार आलम, मोहल्ला मामूड़ी

उपलब्ध संसाधनों में सफाई व्यवस्था बेहतर रखने का प्रयास किया जा रहा है। सफाईकर्मियों की जो समस्याएं हैं, उन्हें दूर करने का प्रयास किया जा रहा है।
-सौम्या गुरुरानी, नगर आयुक्त

मजहर हुसैन, पार्षद

मजहर हुसैन, पार्षद

मजहर हुसैन, पार्षद

मजहर हुसैन, पार्षद

मजहर हुसैन, पार्षद

मजहर हुसैन, पार्षद

मजहर हुसैन, पार्षद

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